नागपुर, रीवा ,इंदौर और ग्वालियर से सरकारी रिकार्ड का भोपाल स्थानांतरण करना बहुत बड़ी चुनौती थी। ऐसा किया जाना आवश्यक भी था और समय पर
Category: हमारा इतिहास
हमारा इतिहास : पटवारी बन गए डिप्टी कलेक्टर…
मध्यप्रदेश के पहले 5 साल बड़े चुनौतीपूर्ण थे चार अलग-अलग प्रदेश जब एक हुए तो सबकी अपनी अपनी संस्कृति और कार्यशैली थी। जहां रजवाड़े वाले
हमारा इतिहास : मध्यप्रदेश में भी बनना थी विधान परिषद्
जब मध्यप्रदेश की विधानसभा का गठन हो रहा था तब विधान परिषद बनना तय था किंतु घटनाक्रम कुछ ऐसा हुआ कि विधान परिषद नहीं बन
हमारा इतिहास : मिंटो हाल एक समय होटल लेकव्यू था
विधानसभा मिंटो हाल में लगना शुरू हुई तभी से उसका नाम विधानसभा भवन हो गया मिंटो हाल का निर्माण सन 1909 में उस समय किया
हमारा इतिहास : बिना विपक्ष की विधानसभा
1 नवंबर को प्रदेश बनने के 47 दिनों बाद 17 दिसंबर 1956 को विधानसभा का पहला अधिवेशन बुलाया गया। मिंटो हाल में जहां पर अब
हमारा इतिहास : वल्लभ भवन की आधारशिला…
वल्लभ भवन की आधारशिला सन 1958 में पंडित जवाहरलाल नेहरू के हाथों रखी गई क्योंकि नई राजधानी बनाने का काम राज्य बनने के साथ ही
हमारा इतिहास : लोहिया की नजर में भोपाल
लोहिया की नजर में भोपाल जितना सुंदर आज भोपाल है बाहर वाले इसकी जितनी तारीफ करते हैं साठ के दशक में भोपाल एक बेतरतीब कस्बे
भारत का इतिहास कैसे लिखें?
असम के महान सेनापति लाचित बरफुकन की 400 वीं जयंति पर बोलते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि भारतीय इतिहास को फिर से
हमारा इतिहास : नहीं मनी जबलपुर में दिवाली
जब भोपाल को राजधानी तय कर लिया गया तो जबलपुर चुप नहीं बैठा उसका 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल दिल्ली में जवाहरलाल नेहरू मौलाना आजाद लाल बहादुर
हमारा इतिहास : भोपाल बैंक का पैसा कराची भेज दिया
पाकिस्तान के गठन के बाद केंद्रीय सरकार की नजर में नवाब हमीदुल्लाह खान की गतिविधियां संदेह से परे नहीं थी दिल्ली की सरकार देश के

