शराब का ठेका बंद कराने पहुंची महिला, मंत्री ने बताया पति को जेल भेजने का रास्ता!

शराब का ठेका बंद कराने पहुंची महिला, मंत्री ने बताया पति को जेल भेजने का रास्ता!

सीहोर में लाड़ली बहना की गुहार पर मंत्री करण सिंह वर्मा का जवाब चर्चा में, शराब की समस्या पर सरकार की जिम्मेदारी को लेकर उठे सवाल

सीहोर। मध्यप्रदेश में शराबखोरी और उससे प्रभावित परिवारों की परेशानी एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। इस बार मामला किसी विपक्षी नेता के आरोप से नहीं, बल्कि एक ऐसी महिला की गुहार से सामने आया है, जो अपने पति की शराबखोरी और मारपीट से परेशान होकर सीधे सरकार के मंत्री के पास मदद मांगने पहुंची थी। लेकिन महिला को जो जवाब मिला, उसने एक नई बहस छेड़ दी है।

दरअसल, सीहोर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान एक लाड़ली बहना ने मंत्री करण सिंह वर्मा से अपने इलाके का शराब ठेका बंद करवाने की मांग की। महिला का कहना था कि उसका पति शराब पीकर घर आता है और उसके साथ मारपीट करता है। शराब की लत ने उसके परिवार का सुख-चैन छीन लिया है। इसलिए यदि इलाके का शराब ठेका बंद हो जाए तो शायद उसकी जिंदगी की मुश्किलें कुछ कम हो सकें। लेकिन महिला की समस्या सुनकर मंत्री जी ने शराब का ठेका बंद कराने के बजाय उसके पति को जेल भिजवाने का रास्ता सुझा दिया। उन्होंने मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी से कहा कि महिला के पति को उसके साथ मारपीट करने के मामले में गिरफ्तार किया जाए। मंत्री ने महिला से कहा कि वह अपने पति के खिलाफ शिकायत दर्ज कराए, पुलिस उसे बंद कर देगी।जब बात शराब के ठेके को बंद कराने की आई तो मंत्री ने अपनी मजबूरी जताते हुए कहा कि अब क्या करें, लोग तो शराब पीते ही हैं।

मंत्री का सुझाव अपनी जगह हो सकता है। घरेलू हिंसा करने वाले व्यक्ति के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी ही चाहिए। किसी भी महिला के साथ मारपीट को सामान्य घटना मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। लेकिन यहां सवाल इससे कहीं बड़ा है।महिला केवल अपने पति की शिकायत लेकर नहीं पहुंची थी, बल्कि वह उस सामाजिक समस्या की ओर ध्यान दिला रही थी, जिसने उसके परिवार को संकट में डाल रखा है। उसकी मांग थी कि शराब की उपलब्धता पर भी सरकार ध्यान दे।आखिर शराबखोरी से प्रभावित परिवारों की जिम्मेदारी किसकी है? क्या हर उस महिला को अपने पति के खिलाफ पुलिस थाने जाना होगा, जिसका घर शराब की वजह से बर्बाद हो रहा है? क्या सरकार की जिम्मेदारी केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करना है, या ऐसी परिस्थितियों को रोकने के लिए नीतिगत कदम उठाना भी है?मध्यप्रदेश में शराब नीति और उससे जुड़े राजस्व का सवाल हमेशा राजनीतिक बहस का विषय रहा है। एक ओर सरकार नशामुक्ति के संदेश देती है, दूसरी ओर शराब की उपलब्धता और उससे मिलने वाले राजस्व को लेकर नीतियां भी चलती रहती हैं।

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