ई-चालान को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

ई-चालान को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी, सुप्रीम कोर्ट का सख्त रुख

नई दिल्ली: भारतभवः ।    

ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन कर ई-चालान कटने के बाद उसे लंबे समय तक जमा नहीं करने वाले वाहन मालिकों के लिए सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है। 28 सितंबर 2026 के आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को बकाया ई-चालानों की वसूली के लिए प्रभावी कदम उठाने के निर्देश दिए हैं।कोर्ट ने कहा कि केवल ई-चालान जारी कर देना पर्याप्त नहीं है, बल्कि बकाया जुर्माने की वसूली भी सुनिश्चित करनी होगी। इसके लिए रैंडम वाहन जांच के दौरान यदि किसी वाहन पर ऐसा ई-चालान पाया जाता है जिसका भुगतान नहीं हुआ है, तो वाहन को जब्त/इंपाउंड करने के लिए आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं।

क्या-क्या हो सकता है?

बकाया ई-चालान का भुगतान नहीं करने पर वाहन मालिक को कई तरह की दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है—

  • वाहन की ऑनलाइन सेवाएं रोकी जा सकती हैं।
  • RC के नवीनीकरण या डुप्लीकेट RC से जुड़ी सेवाओं पर रोक लग सकती है।
  • वाहन का फिटनेस सर्टिफिकेट रोका जा सकता है।
  • वाहन को Parivahan Portal पर ब्लैकलिस्ट किया जा सकता है।
  • वाहन के स्वामित्व हस्तांतरण पर रोक लग सकती है।
  • PUC सर्टिफिकेट जारी करने पर भी रोक का निर्देश दिया गया है।
  • कई उल्लंघनों की स्थिति में ड्राइविंग लाइसेंस के नवीनीकरण या निलंबन की कार्रवाई भी हो सकती है।

                               सुप्रीम कोर्ट के सामने पेश आंकड़ों के अनुसार, देशभर में जारी ई-चालानों में करीब ₹49,194.05 करोड़ की राशि वसूलना बाकी बताई गई, जबकि लगभग ₹26,175.05 करोड़ की वसूली हो चुकी है।सुप्रीम कोर्ट की यह कार्रवाई सड़क सुरक्षा से जुड़े S. Rajaseekaran बनाम Union of India मामले में हुई है, जिसकी निगरानी अदालत लंबे समय से कर रही है। यानी अब ई-चालान सिर्फ मोबाइल पर आने वाला एक मैसेज नहीं रहेगा—उसे नजरअंदाज करने पर वाहन से जुड़ी कई जरूरी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं और जांच के दौरान वाहन इंपाउंड भी किया जा सकता है।

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