कर्नाटक में वोटर लिस्ट पर सियासी संग्राम, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का धरना

कर्नाटक में वोटर लिस्ट पर सियासी संग्राम, मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार का धरना

बेंगलुरु। भारतभवः ।

कर्नाटक में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक विवाद अब सड़क से लेकर चुनाव आयोग के कार्यालय तक पहुंच गया है। गुरुवार को मुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु स्थित मुख्य निर्वाचन अधिकारी के कार्यालय के बाहर धरना दिया और आरोप लगाया कि Form-7 का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने ऐसे मामलों में एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग की।Form-7 का इस्तेमाल मतदाता सूची से किसी नाम को हटाने के लिए आपत्ति दर्ज कराने में किया जाता है। शिवकुमार का आरोप है कि कुछ स्थानों पर पहले से मतदाताओं के नाम, पते और EPIC नंबर दर्ज किए गए Form-7 बड़ी संख्या में बांटे गए और उन्हें सामूहिक रूप से जमा कराया गया। उन्होंने चुनाव अधिकारियों से यह पता लगाने की मांग की कि ऐसे फॉर्म किसने तैयार किए और उनके पीछे कौन लोग हैं।

45 लाख मतदाताओं को नोटिस का मुद्दा भी उठा

शिवकुमार ने SIR के दौरान करीब 45 लाख मतदाताओं को नोटिस दिए जाने का मुद्दा भी उठाया। चुनाव आयोग के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, कर्नाटक की पुरानी मतदाता सूची में 16 जून 2026 तक करीब 5.54 करोड़ मतदाता थे। SIR के बाद प्रकाशित ड्राफ्ट सूची में करीब 4.46 करोड़ मतदाता दर्ज हैं। लगभग 1.08 करोड़ नामों को ASDDO श्रेणी—यानी अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत, डुप्लीकेट अथवा अन्य कारणों—के तहत ड्राफ्ट सूची से बाहर रखा गया।हालांकि, ड्राफ्ट सूची से किसी नाम का बाहर होना अपने-आप अंतिम रूप से मताधिकार समाप्त होना नहीं है। चुनाव अधिकारियों ने दावे, आपत्तियों और सुधार के लिए प्रक्रिया उपलब्ध कराई है तथा संबंधित मतदाताओं को आवश्यक दस्तावेजों के साथ अपना दावा रखने का अवसर दिया जा रहा है।विवाद के बीच चुनाव अधिकारियों की ओर से यह संकेत दिया गया है कि गलत या फर्जी तरीके से बड़े पैमाने पर Form-7 जमा कराने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। भारतीय एक्सप्रेस के अनुसार, गुरुवार के घटनाक्रम के बाद कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर से संबंधित अधिकारियों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए और कुछ मामलों में एफआईआर भी दर्ज हुई हैं।एक अन्य रिपोर्ट के अनुसार, 16 जून से 23 अगस्त के बीच चुनाव कार्यालय को मतदाता नाम हटाने के लिए 67,307 Form-7 आवेदन प्राप्त हुए थे। बाद में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों में 61,130 Form-7 के आंकड़े सामने आने से करीब 6,000 आवेदनों का अंतर भी सामने आया है, जिसकी अधिकारियों ने जांच की बात कही है।

                                डीके शिवकुमार ने इन गतिविधियों के पीछे भाजपा और जेडीएस से जुड़े लोगों के शामिल होने का आरोप लगाया है। दूसरी ओर, इन आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और संबंधित चुनावी प्रक्रिया से ही होगी। ऐसे में फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वास्तव में Form-7 का संगठित तरीके से दुरुपयोग हुआ, किन लोगों ने आवेदन जमा किए और कितने वास्तविक मतदाताओं के नाम प्रभावित हुए।कर्नाटक का यह विवाद इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मतदाता सूची किसी भी चुनावी प्रक्रिया की बुनियादी कड़ी होती है। एक तरफ SIR के जरिए मतदाता सूची को अद्यतन और साफ-सुथरा करने की प्रक्रिया चल रही है, वहीं दूसरी तरफ राजनीतिक दलों की ओर से गलत तरीके से नाम हटाए जाने की आशंकाएं उठाई जा रही हैं। अब चुनाव आयोग की जांच और अंतिम मतदाता सूची यह तय करेगी कि इन आरोपों में कितनी सच्चाई है।

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