UPI पेमेंट पर शुल्क का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, फिलहाल रोक नहीं

UPI पेमेंट पर शुल्क का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, फिलहाल रोक नहीं

नई दिल्ली। भारतभवः 

UPI के जरिए होने वाले बड़े व्यापारी भुगतानों पर प्रस्तावित 0.40% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल इसके लागू होने पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। हालांकि अदालत ने केंद्र सरकार, RBI और NPCI से इस व्यवस्था का कानूनी और नीतिगत आधार स्पष्ट करने को कहा है। नया नियम 15 अक्टूबर 2026 से लागू होना प्रस्तावित है। इसके तहत ₹2,000 से अधिक के कुछ Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.40% MDR लगाया जाएगा। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह शुल्क सीधे आम ग्राहक से वसूलने का प्रावधान नहीं है; सरकार ने अदालत में कहा है कि Person-to-Person (P2P) भुगतान पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

                           अदालत के सामने दायर याचिका में इस बात पर सवाल उठाया गया है कि ₹2,000 की सीमा किस आधार पर तय की गई और UPI तथा RuPay के लिए अलग-अलग व्यवस्था क्यों है। याचिका में संबंधित सरकारी अधिसूचनाओं और MDR व्यवस्था को चुनौती दी गई है।सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से बताया गया कि करीब 96% UPI उपयोगकर्ता इस शुल्क से प्रभावित नहीं होंगे। सरकार का कहना है कि प्रस्तावित MDR का उद्देश्य UPI के डिजिटल भुगतान ढांचे की स्थिरता और उससे जुड़े खर्चों को संभालना है।फिलहाल उपलब्ध व्यवस्था के अनुसार UPI से किसी व्यक्ति को पैसे भेजने पर शुल्क नहीं लगेगा। प्रस्तावित MDR मुख्यतः निर्धारित बड़े व्यापारी लेनदेन पर लागू होगा और सरकार ने कहा है कि इसे ग्राहकों पर सीधे नहीं डाला जाना चाहिए। हालांकि, व्यापारी स्तर पर लागत बढ़ने से इसका अप्रत्यक्ष असर पड़ता है या नहीं, यह आगे महत्वपूर्ण मुद्दा रहेगा।सुप्रीम कोर्ट ने मामले की सुनवाई जारी रखते हुए संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि यह शुल्क व्यवस्था अंतिम रूप से कायम रहेगी या इसमें बदलाव होगा। फिलहाल अदालत ने अंतरिम रोक नहीं लगाई है, इसलिए 15 अक्टूबर से लागू होने वाली प्रस्तावित व्यवस्था पर न्यायिक परीक्षण जारी रहेगा।

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