राम मंदिर प्रबंधन में बड़ा बदलाव, पहली बार नियुक्त हुआ CEO

राम मंदिर प्रबंधन में बड़ा बदलाव, पहली बार नियुक्त हुआ CEO

अयोध्या। भारतभवः 

श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ी चोरी की घटना के बाद मंदिर प्रबंधन को लेकर बड़ा प्रशासनिक बदलाव किया गया है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने पहली बार मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) का पद सृजित करते हुए रिटायर्ड एयर मार्शल जितेंद्र सिंह को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। जितेंद्र सिंह भारतीय वायुसेना में करीब 43 वर्षों तक सेवा कर चुके हैं। उन्हें मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था, संचालन और श्रद्धालुओं से जुड़ी व्यवस्थाओं को अधिक व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने अपनी नियुक्ति को भगवान राम का आशीर्वाद बताते हुए कहा कि देश सेवा के बाद अब श्रीराम मंदिर और रामभक्तों की सेवा का अवसर मिलना उनके लिए सौभाग्य की बात है।

                            CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट के भीतर भी महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं। खाली हुए तीन पदों पर महेश भागचंदका, मदन मोहन पांडे और डॉ. निर्मला यादव को नया ट्रस्टी बनाया गया है।वहीं, महासचिव पद से इस्तीफा देने वाले चंपत राय की जगह गोविंद देव गिरी को नया महासचिव नियुक्त किया गया है। इसके अलावा गोविंद देव गिरी की पूर्व जिम्मेदारी यानी कोषाध्यक्ष पद की जिम्मेदारी अब महेश भागचंदका संभालेंगे।

विवाद के बाद व्यवस्था में बदलाव का संदेश – 

चढ़ावे की रकम में कथित चोरी के मामले के बाद ट्रस्ट में हुए इन बदलावों को मंदिर प्रशासन को अधिक पारदर्शी और जवाबदेह बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खासतौर पर पहली बार CEO की नियुक्ति इस बात का संकेत देती है कि मंदिर के बढ़ते आकार और श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए प्रबंधन को अब अधिक पेशेवर तरीके से संचालित करने पर जोर दिया जा रहा है।नए CEO जितेंद्र सिंह ने भी संकेत दिया कि उनका ध्यान बीते विवादों पर नहीं, बल्कि आने वाली व्यवस्था को बेहतर बनाने पर रहेगा। उनका कहना है कि आने वाला समय अच्छा होगा और भगवान राम की कृपा से आगे सब बेहतर होगा।श्रीराम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में यहां आने वाला दान और श्रद्धालुओं की सुविधाएं केवल आर्थिक या प्रशासनिक विषय नहीं, बल्कि विश्वास से जुड़े मुद्दे भी हैं। यही वजह है कि हालिया घटनाक्रम के बाद प्रबंधन में किया गया बदलाव खास महत्व रखता है।अब सबसे बड़ी चुनौती नए नेतृत्व के सामने यही होगी कि मंदिर की भव्यता के साथ उसकी प्रशासनिक पारदर्शिता और श्रद्धालुओं का विश्वास भी उतना ही मजबूत हो।

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