राजनीतिनामा

चुनावों से पहले गुजरात में समान नागरिक संहिता !

चुनाव आयोग द्धारा अभी तक गुजरात में चुनावों की तारीख की घोषणा नहीं की गई है इससे पहले गुजरात सरकार ने केबिनेट की संभवतः अपनी आखरी बैठक में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए एक समिति गठित करने का फैसला किया है। जानकारी के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल की शनिवार को हुई बैठक के दौरान समिति के गठन के प्रस्ताव को मंजूरी दी गयी। इसे भूपेंद्र पटेल के नेतृत्व वाली कैबिनेट की आखिरी बैठक माना जा रहा है क्योंकि राज्य चुनावों के कार्यक्रम की घोषणा अगले सप्ताह होने की उम्मीद है।

गुजरात के गृह राज्य मंत्री हर्ष सांघवी और केंद्रीय मंत्री पुरुषोत्तम रूपाला ने इस फैसले के बारे में जानकारी देते हुए बताया  समिति की अध्यक्षता उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश करेंगे और इसमें तीन से चार सदस्य होंगे। समिति के सदस्यों के चयन के लिए मंत्रिमंडल ने मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को अधिकृत किया है। उन्होंने कहा कि चुनाव के लिए आदर्श आचार संहिता लागू होने से पहले समिति का गठन किया जाएगा। सांघवी ने कहा कि निर्णय संविधान के खंड.चार के अनुच्छेद 44 के प्रावधानों के अनुसार लिया गया थाए जो राज्य सरकार से सभी नागरिकों के लिए समान कानून लागू करने की अपेक्षा करता है। हमारी सरकार ने इस तरह की संहिता की आम लोगों के साथ.साथ भाजपा कार्यकर्ताओं की इच्छा का भी सम्मान किया है। रूपाला ने जोर देकर कहा कि प्रस्तावित यूसीसी संविधान के तहत गारंटीकृत मौलिक अधिकारों का उल्लंघन नहीं करेगा। उन्होंने दावा किया कि इस फैसले का आगामी विधानसभा चुनावों से कोई लेना.देना नहीं है और उन्होंने विपक्ष की ध्रुवीकरण करने के सभी आरोपो को खारिज कर दिया वहीं विपक्षी दल कांग्रेस ने भाजपा पर आरोप लगाते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता को लागू करने की शक्तियां केन्द्र ;भारत सरकार के पास है। पर्सनल लॉ संसद में पारित होते हैं और गुजरात विधानसभा को यह कानून बनाने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा भाजपा पिछले 27 साल से गुजरात की सत्ता पर काबिज है और पिछले आठ साल से केन्द्र में भी उसकी सरकार है। अब जब विधानसभा चुनाव पास हैंए ऐसे में समान नागरिक संहिता पर फैसला समझ से परे है।

 

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