नई दिल्ली। भारतभवः
देश में चीनी की कीमतों में अचानक आई तेजी ने आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ा दी है। बाजार में चीनी का खुदरा भाव करीब 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गया है, जबकि महज एक महीने पहले यही चीनी लगभग 45 रुपये प्रति किलो के भाव पर उपलब्ध थी। यानी कुछ ही हफ्तों में कीमत में करीब 20 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे बड़ी चिंता यह है कि यह तेजी ऐसे समय में आई है, जब देश में त्योहारी सीजन शुरू होने वाला है। त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने के कारण चीनी की खपत भी बढ़ती है। ऐसे में यदि कीमतों में तेजी जारी रहती है तो इसका सीधा असर घरेलू बजट के साथ-साथ मिठाई और खाद्य कारोबार पर भी पड़ सकता है।
रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण रखने और जमाखोरी तथा कालाबाजारी को रोकने के लिए चीनी कारोबारियों और डीलरों के भंडारण पर सीमा तय की है। प्रत्येक डीलर के लिए चीनी के भंडारण की सीमा 4,000 क्विंटल निर्धारित किए जाने के बाद बाजार में स्टॉक जमा करने की गतिविधियों पर निगरानी बढ़ाई गई है।सरकार का उद्देश्य यह है कि बाजार में कृत्रिम कमी पैदा कर कीमतों को बढ़ाने की कोशिश न हो और उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी उपलब्ध होती रहे।चीनी की कीमतों में यह उछाल आम परिवारों के लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि त्योहारी मौसम में चीनी की मांग तेजी से बढ़ती है। घरों में मिठाइयां और पकवान बनाने से लेकर बाजार में मिठाई, बेकरी और अन्य खाद्य उत्पादों तक चीनी की खपत बढ़ जाती है।यदि मौजूदा कीमतों में और बढ़ोतरी होती है तो इसका असर केवल एक किलो चीनी की खरीद तक सीमित नहीं रहेगा। मिठाई, बेकरी उत्पाद, चाय-कॉफी और चीनी का इस्तेमाल करने वाले दूसरे खाद्य उत्पाद भी महंगे हो सकते हैं।एक महीने में करीब 45 रुपये से 65 रुपये किलो तक पहुंची कीमत ने बाजार की स्थिति पर सवाल खड़े कर दिए हैं। ऐसे में उत्पादन, उपलब्ध स्टॉक, आपूर्ति व्यवस्था, थोक बाजार की कीमत और भंडारण जैसे तमाम पहलुओं पर नजर रखना जरूरी हो गया है।सरकार की ओर से भंडारण सीमा तय करना इस बात का संकेत है कि बाजार में आपूर्ति और कीमतों को लेकर निगरानी बढ़ाई जा रही है। हालांकि, आम उपभोक्ता के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि आने वाले दिनों में चीनी के दाम किस दिशा में जाएंगे।
त्योहारी सीजन में मांग बढ़ने से पहले बाजार में पर्याप्त आपूर्ति बनाए रखना और जमाखोरी पर प्रभावी नियंत्रण करना सरकार के लिए बड़ी चुनौती होगी। फिलहाल 65 रुपये किलो तक पहुंची चीनी की कीमत ने महंगाई को लेकर नई चिंता जरूर पैदा कर दी है।आने वाले दिनों में सरकार की निगरानी, बाजार में उपलब्ध स्टॉक और त्योहारी मांग यह तय करेगी कि चीनी की कीमतें वापस नीचे आती हैं या मौजूदा ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं। इन सबके बीच सॉशल मीडिया पर च्चर्चा गरम है गन्ने से इथेनॉल पेट्रोल बनाये जाने के कारन उसकी उपलब्धता काम हो चली है जिससे चीनी के डैम बढ़ गए है ।
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