बिहार चुनाव परिणाम के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर कांग्रेस के सर्वोच्च नेता राहुल गांधी की जमकर ट्रोलिंग की जा रही है यहां तक कहा जा रहा है कि राहुल गांधी ने एक और क्षेत्रीय पार्टी की राजनीति को खत्म कर दिया है क्योंकि कांग्रेस पार्टी और राहुल गांधी लगातार बिहार में अकेले और स्वतंत्र राजनीति करने की तैयारी में दिख रहे थे। यही कारण है कि गठबंधन में बहुत खटपट हुई। इस साल के शुरू से जितने बार राहुल गांधी बिहार गए हर बार उन्होंने राजद से दूरी रखी। तेजस्वी यादव को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने का फैसला कांग्रेस ने आखिरी समय तक लंबित रखा। इससे जो अविश्वास बना उसका नतीजा यह हुआ कि महागठबंधन की पार्टियां एक दर्जन से सीटों पर एक दूसरे के खिलाफ लड़ीं। इसलिए तेजस्वी यादव ने भी दूरी बनाई। राहुल और प्रियंका की रैलियां अलग हुईं और तेजस्वी ने अपनी रैलियां अलग कीं। दोनों का प्रचार भी अलग अलग चला इस कारण कांग्रेस तो डूबी ही उसके साथ साथ राजद लेफ्ट और वीआईपी भी डूब गए।
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