नई दिल्ली। भारतभवः
शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 24 दिनों से जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अब अपने आंदोलन को लेकर नया संकेत दिया है। वांगचुक ने केंद्र सरकार के सामने एक नई शर्त रखते हुए कहा है कि यदि छात्रों के खिलाफ किसी भी प्रकार की कार्रवाई नहीं करने का भरोसा दिया जाता है, तो वे अपना अनशन समाप्त करने पर विचार कर सकते हैं।
बुधवार को वांगचुक ने केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह को पत्र लिखकर कहा कि आंदोलन में शामिल छात्रों और युवाओं पर किसी प्रकार की दंडात्मक कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उनका कहना है कि यदि सरकार इस संबंध में स्पष्ट आश्वासन देती है, तो बातचीत का रास्ता खुल सकता है और अनशन समाप्त किया जा सकता है।इससे पहले वांगचुक ने सरकार के सामने तीन प्रमुख शर्तें रखी थीं, जिनमें छात्रों के प्रतिनिधियों से सरकार की सीधी बातचीत भी शामिल थी। लेकिन अब उनका पूरा जोर आंदोलन में शामिल युवाओं की सुरक्षा और विश्वास बहाली पर दिखाई दे रहा है।इस बीच कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने भी वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए अनशन समाप्त करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि देश को सोनम वांगचुक जैसे व्यक्तित्व की आवश्यकता है और उनका स्वस्थ रहना आंदोलन से भी अधिक महत्वपूर्ण है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि संगठन का शांतिपूर्ण आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। सीजेपी के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने प्रेस वार्ता में कहा कि संगठन सरकार से संवाद के लिए पूरी तरह तैयार है, लेकिन बातचीत किसी मंत्री के आवास पर नहीं बल्कि किसी तटस्थ स्थान पर होनी चाहिए।
उन्होंने कहा,
“जनता की अदालत जंतर-मंतर है। यदि सरकार संवाद चाहती है तो उसे जनता के बीच आना चाहिए।”
संगठन का आरोप है कि 20 जुलाई को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा से मुलाकात के दौरान मांगपत्र सौंपा गया था, लेकिन उसके बाद सरकार की ओर से कोई औपचारिक प्रतिक्रिया नहीं आई। इसी कारण आंदोलनकारियों में निराशा बढ़ी।दूसरी ओर केंद्र सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह संसद में शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा प्रणाली और नीट परीक्षा से जुड़े सभी मुद्दों पर चर्चा के लिए तैयार है। ऐसे में माना जा रहा है कि दोनों पक्षों के बीच संवाद की संभावना अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है।
24 दिनों के लंबे अनशन के बाद सोनम वांगचुक की नई शर्त इस बात का संकेत है कि आंदोलन अब टकराव से आगे बढ़कर समाधान की दिशा में कदम बढ़ाना चाहता है। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या सरकार छात्रों की सुरक्षा का भरोसा देकर इस गतिरोध को समाप्त कर पाएगी या आंदोलन और लंबा खिंचेगा।
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