लोकतंत्र-मंत्र

एक आम बजट की तीन -तीन आहटें

ये महाकुम्भ काल है। पूरा देश या तो संगम में डुबकियां लगा रहा है या बजट में। बजट यानि आम बजट। मैंने जबसे होश सम्हला है तभी से संगम को भी देख रहा हूँ और आम बजट को भी ,लेकिन ऐसा पहली बार हुआ है कि एक आम बजट आने से पहले जनता को राष्ट्रपति अभिभाषण के माध्यम से परोसा गया। दूसरा बजट खुद केंद्रीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने निर्मल हृदय से पेश किया और वही बजट तीसरी बार माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी जी ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर देते हुए पेश किया।प्रधानमंत्री जी का उत्तर संगीतमय श्रीमदभागवत कथा जैसा था। उनके हर वाक्य पर सत्तारूढ़ दल के सांसद मेजें बजा रहे थे। अब प्रधानमंत्री जी की पीठ तो कोई सीधे ठोंक नहीं सकता ,इसलिए मेजें बजाना ही पहला और अंतिम विकल्प बचता है।
आप प्रधानमंत्री जी को संसद में बोलते देखिये या किसी समुद्र तट पर डोलते हुए देखिये। कुम्भ में डुबकी लगते हुए देखिये या किसी को झप्पी देते हुए देखिये । वे स्थितिप्रज्ञ दिखाई देते हैं। मैंने प्रधानमंत्री जी के भाषण से पहले लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के अलावा लगभग हर दल के सांसदों का भाषण सुना । सत्तापक्ष के भाषणों में स्तुतिगान स्वाभाविक था ,वे अपने प्रधानमंत्री या सरकार से कोई प्रश्न नहीं कर सकते थे,लेकिन विपक्ष के लगभग हर सदस्य ने सरकार से कोई न कोई सवाल किया। मजेदार और खास बात ये रही कि माननीय प्रधानमंत्री जी ने किसी संसद के किसी सवाल का जबाब नहीं दिय। देते भी कैसे ? उन्होंने किसी को बोलते हुए तो प्रत्यक्ष रूप से सुना ही नहीं। केवल उन्हें अपने कक्ष में बैठकर सुना जिनसे सवालों के जबाब में सवाल करना थे।
                      प्रधानमंत्री ने धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए पूरा का पूरा बजट दोहरा दिया ,लेकिन अपनी और से छोंक-बघार लगते हुए। मुझे हैरानी हुई कि धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए भी उनके सिर पर प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू,श्रीमती इंदिरा गाँधी ,राजीव गाँधी और प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी पूरी तरह ही नहीं बुरी तरह से सवार थे। ,माननीय प्रधानमंत्री जी ने 14 वीं बार संसद में धन्यवाद प्रस्ताव का उत्तर दिया है और हर बार अपने विरोधियों को निरुत्तर भी किया है कोई उत्तर न देकर। प्रधानमंत्री जी का भाषण उबाऊ नहीं था ,बड़ा रोचक था। उन्होंने कहा कि उन्होंने झूठे नारे नहीं ,बल्कि सच्चा विकास दिया। मोदी जे इस कथन पर मै तो नहीं लेकिन मेरे साथ ही टीवी पर मोदी जी को बोलते सुन और देख रही मेरी पत्नी अवश्य हंसी। देश में और भी लोग हैं जो मेरी पत्नी की तरह हँसे होंगे।प्रधानमंत्री जी के भाषण की ख़ास बात ये रही कि उन्होंने महात्मा गाँधी के ‘ट्रस्टीशिप ‘ के सिद्धांत की बात की। उन्होंने डॉ भीमराव अम्बेडकर के आरक्षण की बात कही , उन्होंने ओबीसी ,अजा,जजा की बात कही। पहली बार उनके भाषण में न दीनदयाल उपाध्याय आये और न श्यामाप्रसाद मुखर्जी । अटल जी या आडवाणी जी के तो आने का सवाल ही नहीं उठता। उनके भाषण में अरविंद केजरीवाल का शीशमहल भी आया। आना ही था ,क्योंकि दिल्ली विधानसभा का चुनाव जो हो रहा है। बिहार का मखाना भी उनके प्रवचन का हिस्सा था ,क्योंकि बिहारियों की बैशाखी के सहारे उनकी सरकार चल रही है।
                     प्रधानमंत्री जी के भाषण में पूरा आम बजट अक्षरश:दोहराया गया। उनके भाषण में जो नहीं था तो वो था कुम्भ का हादसा। उनके भाषण में यदि कुछ नहीं था तो अमेरिका से अवैध प्रवास की वजह से हथकड़ी लगाकर लौटाए जा रहे भारतीयों का मुद्दा । उनके बजट में वो चीन भी नहीं था जिसका जिक्र राहुल गाँधी और अखिलेश यादव ने बार-बार किया। उनके भाषण में बुलेट ट्रेन नहीं थी। उनके भाषण में अग्निवीर नहीं थे उनके भाषण में लद्दाख और दमन- दीव के संसद के सवालों का कोई उत्तर नहीं था। उनके भाषण में सवाल करने वालों के सवालों के जबाब में सवाल थे ,सिर्फ सवाल। हर सवाल का जबाब ही सवाल था। लग रहा था कि जैसे माननीय कोई फ़िल्मी गीत सुनकर आये थे ,की किसी सवाल का जबाब सवाल के रूप में ही देना है।
धन्यवाद प्रस्ताव पर बोलते हुए प्रधानमंत्री जी ने राष्ट्रपति के अपमान का जिक्र किया। परिहास भी किया। विदेश नीति पर बोलते हुए शशि थरूर को इंगित कर वे हँसे भी। लेकिन उन्होंने नेहरू को कोसते हुए अपनी विदेश नीति की खामियों पर कोई बात नहीं की।उन्होंने इन आरोपों का खंड भी नहीं किया की तरमु साहब के शपथ समारोह का निमंत्रण हासिल करने के लिए उन्होंने विदेश मंत्री को अमेरिका भेजा था । मोदी जी ने न बांग्लादेश की बात की ,न चीन की बात की और न अमेरिका की बात की। उन्होंने किसानों के कल्याण की बात की लेकिन उनके आंदोलन की बात नहीं की। प्रधानमंत्री जी ने देश की आम जनता और किसानों को बता दिया कि भले ही वे जनता के खातों में पंद्रह लाख रूपये न भेज पाए हों लेकिन उन्होंने अपनी तमाम योजनाओं के जरिये जनता के लाखों रूपये बचा दिए हैं। उन्हने दावा किया कि आयुष्मान योजना के जरिये उन्होंने हर भारतीय के कम से कम 70 हजार रूपये सालाना बचाये ,जन आरोग्य औषधालयों के जरिये 30 हजार रूपये बचवाये, नल से जल देकर 40 हजार रूपये की बचत कराईअन्यथा कुएं का पानी पीकर होने वाली बीमारियों पर ये पैसा खर्च करना पड़ता। ,सौर ऊर्जा के तहत बिजली देकर 30 हजार रूपये बचवाये। किसानों को तमाम योजनाओं का लाभ देकर कम से कम 30 हजार रूपये साल की बचत कराई है।प्रधानमंत्री जी ने संविधान के सम्मान की बात कही । प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने जहर की खेती नहीं की। प्रधानमंत्री जी ने कहा कि उन्होंने फर्जीवाड़ा रोका,घोटाले नहीं होने दिया । लेकिन प्रधानमंत्री जी ने वक्फ बोर्ड में तोड़-मरोड़ पर कुछ नहीं कहां । मुसलमानों के लिए तीन तलाक विधेयक की बात कही लेकिन ये नहीं कहा कि उनकी पार्टी किसी मुसलमान को चुनाव लड़ने का मौक़ा नहीं देती। दरअसल प्रधानमंत्री जी को इतना लंबा भाषण इसलिए देना पड़ा क्योंकि उनकी सरकार की तमाम उपलब्धियां इस बजट में माध्यम वर्ग को कर छूट की सीमा 12 लाख करने से बनी सुर्ख़ियों में कहीं छिप गयीं थीं। बहरहाल जो आप नहीं देख पाए, नहीं सुन पाए वो सब संक्षेप में मैंने आपको बताया है।यदि आपकी मर्जी मेजें बजाने की है तो मजे बजाइये और नहीं तो अपना सर बजाइये।
@ राकेश अचल
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