चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अब अपने जन सुराज अभियान को राजनैतिक दल में बदलकर विधानसभा चुनाव में उतरने की पूरी तैयारी कर ली है लेकिन प्रशांत किशोर की इस राजनीति से किसे नफा नुकसान होगा इसका आंकलन लगाना भी बड़ा मुश्किल है गौरतलब है कि पिछले दो सालों से प्रशांत किशोर अपने जन सुराज अभियान के अंर्तगत पदयात्रा पर है और बिहार के लोगो को अपने साथ जोड़ रह है उनकी पदयात्रा का खासा असर भी दिखाई दे रहा है और युवा और नौकरी से रिटायर हो चुके लोगा पीके के साथ जुड़ रहे है इसी को देखते हुए बिहार में जदयू भाजपा और राजद मंे की चिंता बढ गई है क्योकि पीके अपनी यात्रा में नरेंद्र मोदी नितिश कुमार पर भी निशाना साधते है लेकिन सबसे अधिक परेशान लालू यादव और तेजस्वी यादव है जिन्हे लगता है कि आगामी चुनाव में पीके उन्हे ही सबसे अधिक नुकसान पहंुचाने वाले है इसलिये उनकी पार्टी ने एक सार्वजनिक चिटठी लिखकर अपने कार्यकर्ताओं को पीके के जनसुराज दल से दूर रहने की सलाह दी है।
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