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नेपाल में कुदरत का कहर बाढ़ ने मचाई तबाही, 105 भारतीयों समेत सैकड़ों लापता

काठमांडू/नेपाल।नेपाल में बुधवार को अचानक आई भीषण बाढ़ ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। तिब्बत सीमा से लगे इलाकों में आई इस प्राकृतिक आपदा में अब तक कम से कम 18 लोगों की मौत की सूचना है, जबकि 384 पर्यटकों और यात्रियों के लापता होने की खबर सामने आई है। इनमें 105 भारतीय पर्यटक भी शामिल बताए जा रहे हैं। नेपाल में रह रहे 37 प्रवासी भारतीयों के बारे में भी फिलहाल जानकारी नहीं मिल सकी है।नेपाल पुलिस के मुताबिक, सबसे ज्यादा नुकसान रसुवा, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा जिलों में हुआ है। अब तक रसुवा में एक, नुवाकोट में सात, धादिंग में छह और गोरखा में चार शव बरामद किए गए हैं। अधिकारियों को आशंका है कि राहत और बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ मृतकों की संख्या बढ़ सकती है।बाढ़ की भयावहता का अंदाजा सामने आ रहे वीडियो से लगाया जा सकता है। तेज बहाव के कारण मकान, पुल और वाहन तक पानी में बहते दिखाई दे रहे हैं। कई महत्वपूर्ण सरकारी और सार्वजनिक ढांचे भी इसकी चपेट में आए हैं। पुलिस थाने, सीमा शुल्क केंद्र और निजी मकानों को भी नुकसान पहुंचने की सूचना है प्रभावित इलाकों में बड़ी संख्या में लोग फंसे हुए हैं। लापता लोगों की तलाश के लिए नेपाल में बड़े स्तर पर खोज और बचाव अभियान शुरू किया गया है। सीमा के दोनों ओर मौजूद लोगों की स्थिति का पता लगाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।

                        इस आपदा ने भारत में भी चिंता बढ़ा दी है। नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार लापता यात्रियों में 105 भारतीय पर्यटकों के शामिल होने की सूचना है। इसके अलावा नेपाल, ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और नीदरलैंड के नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी दी गई है।कई लोगों की राष्ट्रीयता की अभी पुष्टि नहीं हो सकी है। ऐसे में राहत एजेंसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की पहचान और उनके परिजनों तक सही जानकारी पहुंचाना है।हालात की गंभीरता को देखते हुए नेपाल सरकार ने मंत्रिमंडल की आपात बैठक बुलाई है। बैठक में राहत एवं बचाव अभियान की समीक्षा के साथ आगे की रणनीति पर चर्चा किए जाने की बात सामने आई है।

                       भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नेपाल के प्रधानमंत्री बलेंद्र शाह से फोन पर बातचीत कर इस त्रासदी पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि संकट की इस घड़ी में भारत अपने नेपाली भाई-बहनों के साथ मजबूती से खड़ा है और जरूरत पड़ने पर हरसंभव मानवीय सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है।नेपाल में जारी यह आपदा एक बार फिर याद दिलाती है कि पहाड़ी क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ कितनी तेजी से बड़े संकट में बदल सकती है। फिलहाल निगाहें राहत और बचाव अभियान पर टिकी हैं और सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि लापता लोगों को जल्द से जल्द सुरक्षित खोज लिया जाए।

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