मध्य प्रदेश के गठन को 2 महीने ही हुए थे कि रविशंकर शुक्ल नहीं रहे आजादी की लड़ाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के साथ-साथ वह सन 1937 से सन 1939 के सेंट्रल प्रोविंस के पहले मंत्रिमंडल में शिक्षा मंत्री के रूप में रहे। उस समय उनके द्वारा शुरू की गई विद्या मंदिर योजना देश की शिक्षा जगत की बड़ी योजना थी उसके बाद वे लगातार 12 वर्षों तक मुख्यमंत्री रहे। रविशंकर शुक्ल के नागपुर में मंत्रिमंडल के चार सदस्य उनकी मृत्यु के पश्चात मुख्यमंत्री हुए। मध्य प्रदेश में भगवंतराव मंडलोई व द्वारका प्रसाद मिश्र एवं महाराष्ट्र में मारोतराव सांभशिव कन्नमवार जो कि स्वास्थ्य मंत्री थे और वसंतराव नायक जो राजस्व मंत्री थे। इस तरह पुराने मध्य प्रदेश के दो नेता भी महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे।
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