जनशक्ति पार्टी भाजपा की नकल थी
अयोध्या तक की पदयात्रा करने के दौरान उमा भारती को पूरा भरोसा था कि पार्टी उन्हें मना लेगी। पिछले उदाहरणों की तरह वे फिर से भाजपा में वापस आ जायेंगी। लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। उल्टा भाजपा को लगा कि उमा भारती के बाहर रहने से सारे विवादों से पार्टी दूर है। अंततः लगभग छह महीनों के इंतजार के बाद उमा भारती ने 30 अप्रैल 2006 को उज्जैन में भारतीय जनशक्ति पार्टी के गठन की घोषणा की। उन्होंने अपनी पार्टी का नाम भारतीय जनशक्ति रखा इसलिए क्योंकि वे इसका छोटा स्वरूप “बीजेएस” के रूप में देखना चाहती थीं। एक समय भारतीय जनता पार्टी के पिछले अवतार भारतीय जनसंघ को “बीजेएस” के नाम से ही पुकारा जाता था। मध्यप्रदेश में आरएसएस और भाजपा के सभी काम उज्जैन के महाकाल मंदिर से आरंभहोते रहे हैं। दिग्विजय सिंह की सरकार उखाड़ने के लिए 2003 में उमा भारती की यात्रा उज्जैन से ही आरंभ हुई थी। अपनी नयी पार्टी बनाने के लिए उमा भारती ने इसी कारण से उज्जैन को चुना। जिस दिन पार्टी की स्थापना हुई उमा भारती ने भाजपा के वरिष्ठ नेता संघप्रिय गौतम को इसका कार्यकारी अध्यक्ष बनाया तथा रघुनंदन शर्मा को महामंत्री। उस दिन दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री मदनलाल खुराना जो भाजपा से बर्खास्त चल रहे थे, उज्जैन में खासतौर पर उपस्थित थे।
“राम” के लिये समाजवादियों का प्रस्ताव ठुकराया
जनशक्ति के बनने के साथ ही यह खबर आम थी कि एक न एक दिन उमा भारती को वापस भाजपा में जाना ही है। जनशक्ति की जो पंच निष्ठाएँ थीं वे जनसंघ से ही ली गई और उमा भारती खुलेआम कहती भी थीं कि उनकी मातृ संस्था आरएसएस ही है और पिण्ड हिन्दुत्व का। वर्ष 2008 के पहले जब कुछ समाजवादी और कांग्रेसी नेताओं ने उमा भारती से मिलकर तीसरे मोर्च के संबंध में बात करना चाही तो उन्होंने “राम” को छोड़ने से स्पष्ट मना कर दिया। अपनी नई पार्टी के गठन के साथ ही उमा भारती ने भाजपा और कांग्रेस का प्रदेश में विकल्प बनने की कोशिशें आरंभ कर दीं। इसके लिये वे हर दिन कोई न कोई कार्यक्रम करती पूरे प्रदेश में सड़क मार्ग से दौरे चालू कर दिए विरोध प्रदर्शन करने का कोई भी मौका वो अपने हाँथ से जाने नहीं देतीं ।
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