मप्र भाजपा के वरिष्ठ नेता और मप्र सरकार के मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव से भी वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय कोप भवन में हैं. ये हकीकत है जो अब अफसाना बनता जा रहा है. कैलाश जी ने अचानक मौन समाधि क्यों ली है ये कोई नहीं जानता. सब अटकलें लगा रहे हैं.देश के सबसे स्वच्छ माने जाने वाले शहर इंदौर के सबसे दबंग, बहुमुखी प्रतिभा के धनी भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय भागीरथपुरा कांड के बाद सूबे की सियासत में असहज दिखाई दे रहे है, अब उनके गुस्से को केकैयी कोप की संज्ञा दी जा रही है.पहले कैबिनेट की बैठकों से कैलाश विजयवर्गीय का अक्सर दूर रहना और अब 10 दिन के लिए पूरी तरह सार्वजनिक कार्यक्रमों से दूर रहने के ऐलान ने इन चर्चाओं को और बल दे दिया है कि क्या कैलाश विजयवर्गीय सरकार में नाराज चल रहे है और अपनी स्थिति से खुश नहीं हैं।इधर गणतंत्र दिवस पर ध्वज फहराने के लिए मंत्रियों की सूची में कैलाश विजयवर्गीय का नाम गायब हुआ उधर कैलाश विजयवर्गीय ने अपने सार्वजनिक अवकाश का ऐलान कर दिया.धार के प्रभारी मंत्री होने के बाद भी बसंत पंचमी के दिन भी कैलाश विजयवर्गीय भोजशाला नहीं गए हालांकि कैलाश विजयवर्गीय के दफ्तर से यह बताया गया है कि पारिवारिक मित्र की पत्नी का निधन के चलते वह 10 दिन किसी कार्यक्रम में शामिल नहीं होंगे।इंदौर का सजग मीडिया अभी तक ये पता नहीं लगा सका कि कैलाश जी के वे पारिवारिक मित्र कौन हैं जिनकी पत्नी के निधन पर कैलाश जी ने पूरे 10 दिन की छुट्टी ली.
कैलाश विजयवर्गीय मप्र में उमा भारती के अपदस्थ होने के बाद से ही मुख्यमंत्री की कतार में हैं लेकिन दो दशक के लंबे इंतजार के बाद भी उनका नंबर नहीं आया. वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के बाद जब डॉ. मोहन यादव को प्रदेश का मुख्यमंत्री बना कर कैलाश विजयवर्गीय को उनके अधीन मंत्री बनाया गया तो कैलाश जी के सब्र का बांध छलक उठा. सियासी गलियारों में यह अटकलें लगाई जाने लगीं कि कैलाश विजयवर्गीय भाजपा आलाकमान के इस फैसले से खुश नहीं है।
मप्र में शिवराज सिंह चौहान निष्कंटक राज कर सकें इसके लिए भाजपा हाईकमान ने कैलाश विजयवर्गीय को मप्र से बेदखल कर भाजपा का राष्ट्रीय महासचिव और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों के प्रभारी बना दिया था. कैलाश विजयवर्गीय जब 2023 में एक दशक के बाद प्रदेश की राजनीति में लौटे तो उन्हे उम्मीद थी कि उन्हें मुख्यमंत्री बनाया जाएगा, किंतु ये भी नहीं हुआ. मंत्री बनाया तो भी कोई बड़ा विभाग नहीं मिला. कैलाश विजयवर्गीय जिस विभाग को दशक पहले संभाल चुके थे उन्हें वहीं नगरीय प्रशासन विभाग दिया गया। वे अपनी वरिष्ठता के हिसाब से इस पोर्टफोलियो को छोटा मानते हैं।सब जानते हैं कि कैलाश विजयवर्गीय के गृह जिले में प्रशासनिक नियुक्तियां भी उनकी मर्जी से नहीं हुई, हद तो तब हो गई जब गणतंत्र दिवस समारोह में ध्वजारोहण के लायक भी नहीं समझा गया, जबकि विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर को उनके गृहजिला ग्वालियर में ध्वजारोहण का मौका दे दिया गया. खुद मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव कैलाश जी को तंज मारने लगे हैं.हाल ही में सरकार के दो साल पूरे होने पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने जब कहा कि वह इंदौर के प्रभारी मंत्री नहीं है तो कैलाश विजयवर्गीय ने दो टूक शब्दों में कहा कि हम तो आपको ही प्रभारी मंत्री समझते थे और इंदौर के अफसर आपके नाम पर धमकाते थे।इंदौर के भागीरथपुरा कांड के बाद तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के बीच चल रही खींचतान को भी सतह पर ला दिया है। इंदौर में दूषित पानी से मौतों पर स्थानीय विधायक और नगरीय प्रशासन मंत्री होने के नाते कैलाश विजयवर्गीय ने सार्वजनिक तौर पर अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की बात कही। कैलाश विजयवर्गीय ने सार्वजनिक तौर पर कहा कि अधिकारियों की लापरवाही से यह दुखद घटना हुई और दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा.भगीरथपुरा कांड के बाद कैलाश विजयवर्गीय कैबिनेट की बैठक में भी नहीं गए. उलटे वे प्रदेश भाजपा कार्यालय गए और खुले मैदान में संगठन महामंत्री हितानंद से चर्चा की.अब माना जा रहा है कि कैलाश विजवय्गीय एक तरह की प्रेशर पॉलिटिक्स कर रहे है। अब देखना है कि भविष्य में प्रदेश की राजनीति में कैलाश विजयवर्गीय की क्या भूमिका होगी? क्या कैलाश का कोप उनके मनोरथ को पूरा करेगा या उन्हे मुख्य धारा से बाहर निकाल फेंकेगा.
श्री राकेश अचल ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश
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