नई दिल्ली। भारतभवः
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर देशवासियों से आर्थिक रूप से जिम्मेदार और स्वदेशी विकल्पों को अपनाने की अपील की है। मंगलवार को सोशल मीडिया पर जारी एक वीडियो संदेश में प्रधानमंत्री ने लोगों से गैरजरूरी सोने की खरीदारी से बचने, विदेश घूमने और विदेश में शादी करने के बजाय देश में ही पर्यटन एवं आयोजनों को बढ़ावा देने का आग्रह किया।
प्रधानमंत्री की यह अपील ऐसे समय आई है जब उन्होंने भारत की 7.8 प्रतिशत जीडीपी विकास दर को देशवासियों की इच्छाशक्ति, मेहनत और सामूहिक शक्ति का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि देश को विकास की इस रफ्तार को बनाए रखते हुए आगे और तेजी से बढ़ना होगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने वीडियो में कहा कि यदि सोने की आवश्यकता नहीं है तो उसकी खरीदारी से बचना चाहिए। इससे पहले भी वे देशवासियों से गैरजरूरी सोना खरीदने से बचने की अपील कर चुके हैं।
दिए गए विवरण के मुताबिक, प्रधानमंत्री की अपील के बाद सोने की कीमत में प्रति 10 ग्राम करीब एक हजार रुपये तक की कमी दर्ज की गई।
प्रधानमंत्री ने लोगों से पर्यटन के लिए विदेश जाने के बजाय देश के भीतर घूमने और भारतीय पर्यटन स्थलों को बढ़ावा देने का आग्रह किया। उन्होंने विदेश में शादी करने की प्रवृत्ति पर भी सवाल उठाते हुए देश में ही ऐसे आयोजनों को प्राथमिकता देने की बात कही।
उनका संदेश साफ था—खर्च देश में होगा तो उसका लाभ भी देश की अर्थव्यवस्था और स्थानीय कारोबार को मिलेगा।
प्रधानमंत्री ने देशवासियों से स्वदेशी वस्तुओं को अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के अभियान को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जितना अधिक देश स्वदेशी और आत्मनिर्भरता पर जोर देगा, उतनी ही मजबूती से भारत आगे बढ़ेगा।
यह अपील केवल खरीदारी की आदतों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे घरेलू उद्योग, स्थानीय रोजगार और भारतीय बाजार को मजबूत करने का संदेश भी दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री ने भारत की 7.8 प्रतिशत विकास दर का उल्लेख करते हुए इसे देशवासियों की सामूहिक मेहनत का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि देश में कुछ लोग निराशा फैलाने और ‘झूठ की गूंज’ के जरिए माहौल खराब करने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन इन चुनौतियों के बावजूद भारत ने मजबूत आर्थिक विकास दर्ज किया है।
हालांकि, प्रधानमंत्री ने किसी का नाम नहीं लिया, लेकिन उनके इस बयान को राजनीतिक तौर पर विपक्ष पर निशाने के रूप में देखा जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में विकसित भारत के लक्ष्य का भी उल्लेख किया। उन्होंने विश्वास जताया कि जब भारत अपनी आजादी के 100 वर्ष पूरे करेगा, तब देश की युवा पीढ़ी को एक विकसित और मजबूत भारत सौंपा जाएगा।
कुल मिलाकर प्रधानमंत्री का संदेश तीन प्रमुख बातों पर केंद्रित रहा—अनावश्यक खर्च कम करना, स्वदेशी को बढ़ावा देना और देश की आर्थिक ताकत को मजबूत करना। अब सवाल यह है कि सोना, विदेश यात्रा और विदेशी सामान से जुड़े प्रधानमंत्री के इस संदेश को आम भारतीय कितनी गंभीरता से अपनाता है।
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