जगद्गुरू श्री रामभद्राचार्य जी ने हुनुमान चालीसा में चार पंक्तिया बताई है जो अपभ्रष होते होते गलत अर्थ लिये हुए है उन्हाने उन गलतियों का सत्य अर्थ एवं भाव भी बताया
1 शंकर सुमन नहीं शंकर स्वयं केशरी नंदन
2 सदा रहो रघुपति के दासा नहीं सादर हो रघुपति के दासा
3 सब पर राम तपस्वी राजा नहीं राम सर ताजा
4 जो सत बार पाठ कर कोई नहीं सब बार पाठ कर जोई
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https://youtube.com/shorts/6AirL2Y9U88
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