निरोगी-काया

बाल डेंटिस्ट्री:एक कला भी, कारोबार भी…

मनुष्य की देह में बाकी सब अंग या तो जोड़े से हैं या एकदम अकेले।केवल दांत हैं जो एक -दो नहीं अपितु पूरे 32 होते हैं। इसीलिए दंत चिकित्सा दुनिया में सबसे ज्यादा फायदे का धंधा है। खासकर बच्चों के दांतों की चिकित्सा। इसमें यदि कलात्मकता जोड़ दी जाए, तो धंधा दोगुना ज्यादा फायदा देता है। मैंने मुस्लिम देशों में दंत चिकित्सकों की चांदी होते देखी है। दुबई जैसे देश में दंत चिकित्सक दूसरे चिकित्सकों से ज्यादा कमाते हैं, लेकिन अति विकसित देशों में तो दंत चिकित्सा और भी ज्यादा फायदेमंद है। इसमें कम लागत में अधिक मुनाफा कमाया जा सकता है। अमेरिका में बच्चों की दंत चिकित्सा को लेकर जागरूकता अधिक है। यहां बच्चों के अलग दंत चिकित्सक हैं और चिकित्सालय भी। ये दंत चिकत्सालय बच्चों की अभिरुचि को देखकर डिजाइन किए गए हैं। यहां बच्चों के लिए वीडियो गेम से लेकर दीगर खेल, खिलौने और टीवी सीरियल देखने के लिए टीवी सेट लगे हैं। बच्चों की दंत चिकित्सा में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अभिभावकों को शल्य कक्ष में उपस्थित रहने की अनुमति दी गई है। अधिकांश दंत चिकित्सक युवा लड़के, लड़कियां हैं जो खुशमिजाज होते हैं। उन्हें देखकर बच्चे न रोते हैं और न ठिनकते है।
                                 उपचार के लिए बाकायदा आनलाइन समय लेना होता है। बिना पूर्व सूचना के गैर हाजिर रहने पर आपके बिल में 25 डालर क्षतिपूर्ति के जोड़े जा सकते हैं समय पर न पहुंचने पर आपका अपाइंटमेंट पंद्रह मिनट बाद फिर से तय किया जा सकता है। हर बार दंत चिकित्सालय में रिसेप्शन बना है जहां आपको लाग इन और लाग आउट करना होता है।सारा शुल्क बीमा कंपनी की ओर से और अभिभावकों से आनलाइन लिया जाता है। चिकित्सक बच्चों के साथ दोस्ताना संबंध बनाए रखने के लिए अवसर और उत्सव के हिसाब से अपनी ड्रेस बदलते रहते हैं।। चिकित्सालय के बाहर पर्याप्त पार्किंग उपलब्ध रहती है। अमेरिका में इस समय एक मोटे अनुमान के हिसाब से 19 लाख दंत चिकित्सक हैं। यहां दंत चिकित्सा पाठ्यक्रम प्रायः दो साल का (स्नातक) होता है।सभी पंजीकृत होते हैं। भारत में भी अब दंत चिकित्सा को लेकर जागरूकता बढ़ी है, फिर भी हमारे यहां दंत चिकित्सकों की भारी कमी के चलते आज भी गरीब लोग सड़कछाप दंत चिकित्सकों पर निर्भर है।भारत में दंत चिकित्सा का जनक डॉ रफीउद्दीन अहमद को माना जाता है। उन्होंने अमेरिका में दंत चिकित्सा का अध्ययन करने के बाद भारत में सौ साल पहले 19 छात्रों को लेकर दंत चिकित्सा का अध्यापन आरंभ किया था। कम उम्र में ही बच्चों के दांत खराब होने के पीछे वजह अभिभावक का लापरवाह होना है। बच्चों की बीमारी के बारे में कई बार तो ध्यान ही नहीं देते हैं, जब परेशानी ज्यादा हो जाती है तब जाकर वह डॉक्टरों से संपर्क करते हैं। इस बावत हाल में मौलादा आजाद डेंटल कॉलेज में 1000 बच्चों पर 2016 से 2018 के बीच शोध किया गया था। जिसमें कई चौंकाने वाले नतीजे सामने आये हैं। शोध में खास यह रहा कि 90 प्रतिशत माता-पिता ने माना कि उन्हें बाल दंत चिकित्सा की विशेषता के बारे में जानकारी नहीं है।
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