चुनावों के समय साम्प्रदायिकता सिर चढ़कर बोलती है। कुछ पार्टियाँ तो जाति और धर्म के नाम पर ही पहचानी जाती हैं। ऐसे ही एक दल समाजवादी पार्टी के प्रदेश प्रमुख गौरी यादव का अशोक नगर से फार्म स्क्रूटनी के समय निरस्त हो गया। सपा हमेशा से मध्यप्रदेश में दूसरे दलों की सुविधा के लिए राजनीति करती रही है। जब-जब भी मुसलमान वोटों को बांटना होता समाजवादी पार्टी का उम्मीदवार अवश्य मैदान में होता। भोपाल से आरिफ मसूद सपा की तरफ से खड़े हुए। जब दिग्विजय सिंह ने उनसे सेक्यूलर वोटों के बंटवारे की दुहाई देते हुए अपनी उम्मीदवारी वापस लेने को कहा तो मसूद ने दिग्विजय सिंह को जवाब दिया कि “यदि दिग्विजय सिंह इस्लाम कबूल कर लेंगे तो वे चुनाव नहीं लड़ेगें।” उधर चंबल के लहार विधानसभा क्षेत्र में धर्मगुरु रावतपुरा सरकार और विधायक डॉ गोविन्द सिंह के बीच बड़ी जंग छिड़ गई। रावतपुरा सरकार ने चुनौती देकर गोविन्द सिंह के चुनाव में हराने की बात कही। मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने बहुत सुलह कराने की कोशि की लेकिन तब तक मामला बिगड़ चुका था। यह बात अलग है कि बाद में गोविन्द सिं चुनाव जीते और तब से लगातार जीत रहे हैं। रावतपुरा सरकार जिन्हें आरंभ में कांग्रेस नेताओं ने खूब अपने यहां कार्यक्रमों में बुलाया बाद में भाजपा के प्रिय धर्मगुरु बन गये
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