सम्पादकीय

भक्तमाल के भक्ति रस में सराबोर सागर

मध्यप्रदेश का सागर शहर इन दिनो भक्ति की एक अदभुत रसधार से सराबोर है जी हां श्रीमदभागवद और रामकथा से इतर भक्तमाल कथा भारतीय भक्ति साहित्य की एक महत्वपूर्ण रचना है जो भक्तों की जीवनगाथाओं का संग्रह है। इसका उद्देश्य विभिन्न भक्तों के भक्ति भाव आचरण और आध्यात्मिक प्रेरणा को लोगों तक पहुँचाना है। 16 वीं शताब्दी में लगभग 1585 में रामानंदी संप्रदाय परंपरा  के परम भक्त संत नाभादास जी द्धारा भक्तमाल कथा लिखी गई जिसमें सतयुग से लेकर कलयुग तक लगभग 200 महात्माओं का जीवन चरित्र वर्णित है । भक्तमाल कथा का तात्पर्य है भक्तमाल ग्रंथ में वर्णित भक्तों की कथाएँ।ये कथाएँ भारत के प्रसिद्ध संतों भक्तों और साधकों के जीवन की घटनाओं चमत्कारों और ईश्वर भक्ति के भाव को दर्शाती हैं। कथा में संतों का जीवनचरित इसमें कबीर, तुलसीदास, रैदास, सूरदास, मीरा बाई, नामदेव, धन्ना जैसे अनेक संतों की कहानियाँ शामिल हैं।और बड़ी बात है इस कथा में साम्प्रदायिक समरसता हिंदू.मुस्लिम ब्राह्मण,अछूत, स्त्री,पुरुष सभी जातियों के भक्तों को स्थान दिया गया है। भक्ति का महत्व को सर्वोपरि रखते हुए इसमें यह दर्शाया गया है कि जाति ,लिंग या वर्ग नहीं बल्कि ईश्वर के प्रति प्रेम और समर्पण ही श्रेष्ठ है।सरल भाषा और शैली अवधी भाषा में लिखी गई होने के कारण यह ग्रामीण जनसमुदाय में भी लोकप्रिय रही।

सागर में इस कथा का वाचन मर्म को जानने वाले श्री 108 स्वामी महंत श्री किशोर दास देव जू महाराज जी द्धारा किया जा रहा है । भक्तमाल के सार को सांझा करते हुए सर्वप्रथम ही उन्होने यह बताया कि भक्ति मार्ग सबके लिए खुला है चाहे वह राजा हो या रंक। उनहोने कहा कि भक्ति रूपी बीज को अपने हृदयरूपी खेत में रोपना और उसे विशाल वटवृक्ष में परिर्वतित होने के लिये मनुष्य को भांति भांति के यत्न करने पडते है। अपने विचारों को सात्विकता प्रदान करना होती है , काम का्रेध मद मोह रूपी जानवरो से अपने भक्ति रूपी पौध की रक्षा करना होती है और जब साधक इन प्रयासो में सफल हो जाता है और उसकी भक्ति रूपी पौधे की जड़े मजबूत हो जाती है तब वह भक्ति एक वटवृक्ष में बदल जाती है और फिर कोई कितना भी विशाल जानवर रूपी कुविचार आये वह भक्ति को हानि नहीं पहुंचा सकता बल्कि भक्ति रूपी वटवृक्ष की शरण में आ जाता है।यही भक्तमाल का कथा का मूल है जहां महान भक्ति संतो के जीवन परिचय और उनके जीवन में घटने वाली चमत्कारिक
घटनाओं को अत्यंत सरल भाषा में पिरोकर भजन के माध्यम से प्रस्तुत करना भक्तमाल कथा केवल धार्मिक कथा नहीं बल्कि एक आध्यात्मिक आंदोलन है जो हमें सिखाती है कि ईश्वर प्रेम सेवा और श्रद्धा ही सबसे ऊँचा धर्म है।यह भारत की भक्ति परंपरा का अमूल्य रत्न है जो आज भी लोगों को भक्ति समर्पण और सहिष्णुता की प्रेरणा देता है।

अभिषेक तिवारी 

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