कलमदार

ए. आई. (A. I. )भय का भूत या सचमुच का भस्मासुर

आवश्यकता ही आविष्कार की जननी होती है ये जुमला होश सम्हालते ही रट लिया था पर आज आविष्कार ही मनुष्यता को भयाक्रांत कर रही है. इस दशक का सबसे बडा आविष्कार ए. आई. यानि आर्टीफीसियल इंटेलीजेंस अर्थात कृत्रिम मेधा मनुष्य को सबसे ज्यादा भयभीत कर रही है. ताजा खबरों के मुताबिक ए. आई. के डर से सिर्फ 8 दिन में 6 लाख करोड़ डूबे, अब टी. सी. एस. और इन्फोसिस समेत बड़ी आई. टी.कंपनियों ने अपनी रणनीति में व्यापक बदलाव किए हैं आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को लेकर बढ़ती आशंकाओं का असर सिर्फ नौकरियों तक सीमित नहीं है, बल्कि शेयर बाजार पर भी इसका सीधा प्रभाव दिख रहा है. पिछले आठ कारोबारी दिनों में आईटी स्टॉक्स में भारी बिकवाली के चलते करीब 6 लाख करोड़ रुपये की मार्केट वैल्यू घट चुकी है. निफ्टी आई. टी.इंडेक्स में 8 प्रतिशत से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है, जो निवेशकों की चिंता को दर्शाता है. सबसे पहले आपको बता दूं कि आई. टी.कोई रातों- रात का आविष्कार नही है. सन 1956 में अमेरिका के शीर्ष कंप्यूटर विशेषज्ञ जान मैकार्थीने डार्ट माउथ सम्मेलन में पहली बार आयोजित की.पहली बार ए. आई. यानि “Artificial Intelligence” शब्द का औपचारिक उपयोग किया था.आप कह सकते हैं कि ए. आई.एआई कोई अचानक पैदा हुई तकनीक नहीं है. एआई 1956 में जन्मी… लेकिन 2023 के बाद अचानक “हर घर में चर्चा और बाद में बाजार को आतंकित करने वाली तकनीक क्यों बन गई? तो सीधी वजह है — तकनीक पहली बार आम आदमी के हाथ में आ गई।आज चैटजीपीटी ने( ChatGPT) ने एआई को घर-घर पहुँचा दिया है.चैटजीपीटी ने2022 में लॉन्च किया और सिर्फ 2 महीनों में 100 मिलियन यूज़र्स बना लिए.पहली बार लोग खुद ए. आई. से बात करने लगे पहले ये ए. आई.पर्दे के पीछे काम करती थी.अब सीधे स्क्रीन पर दिखने लगी है. तस्वीर, वीडियो, आवाज़ सब बनाने लगी है इस तकनीक से चलने वाली मशीन. ए. आई. जैसे जादूगर हो. इधर टेक्स्ट लिखो उधर फोटो तैयार.इधर स्क्रिप्ट दो उधर पलक झपकते ही वीडियो तैयार.आवाज़ दो और क्लोन तैयार. बस मशीन की इसी रफ्तार से डर भी शुरू हुआ. लगने लगा कि ए. आई. की वजह से तो “नौकरी चली जाएगी? लेकिन सच-झूठ कैसे पहचानेंगे?”
                                           आज दुनिया में प्रमुख 3. कंपनियों के बीच ए. आई. को लेकर होड है.ओपन ए. आई., गूगल और माइक्रोसाफ्ट ने इस आक्रामक तकनीक पर अरबों डॉलर का निवेश किया है.हर कंपनी अपने ए. आई. टूल लॉन्च कर रही है. ए. आई अब सिर्फ रिसर्च नहीं, बिज़नेस का हथियार बनती जा रही है. आज दुनिया में मोबाइल + इंटरनेट + डेटा सबसे बडी दौलत है.अब हर जेब में स्मार्टफोन है। ए. आई. को चाहिए डेटा — और दुनिया ने उसे भरपूर डेटा दे दिया।आज ए. आई. लोवान के धुएं की तरह हर क्षेत्र में फैल गई है. सिर्फ लैब में नहीं आपके मोबाइल में,शोध का विषय हो या रोज़मर्रा का औज़ार.लेखन, वीडियो, कोड, डिज़ाइन, पढ़ाई सबको ए. आई. सरल बना रही है. फिर भी दुनिया ए. आई. से आतंकित है. डरी हुई है. दुनिया के शेयर बाजारों में गिरावट इस भय का जीवंत प्रमाण है. मैने पहले ही कहा कि ए. आई. नयी नहीं है. पूरे 70 की हो चुकी है. फर्क सिर्फ इतना है कि अब वह “दिख” रही है।पहले मशीन इंसान की मदद करती थी।अब मशीन इंसान जैसी बात करने लगी है।यही बदलाव चर्चा को तूफान बना रहा है।लोग ए. आई को भस्मासुर मानने लगे हैं. प्रतिद्वंदी मानने लगे हैं.
                                         ए. आई का आई. टी. जगत पर जबरदस्त असर है.बाजार में डर इस बात का है कि एआई आधारित टूल्स एप्लिकेशन डेवलपमेंट, मेंटेनेंस और टेस्टिंग जैसी पारंपरिक आईटी सर्विसेज को काफी हद तक ऑटोमेट कर सकते हैं. इससे कंपनियों के मौजूदा बिजनेस मॉडल और मार्जिन पर दबाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है. इस डर के बीच प्रमुख सॉफ्टवेयर कंपनियां लगातार यह भरोसा दिला रही हैं कि एआई उनकी सेवाओं को खत्म नहीं करेगा, बल्कि उन्हें और सक्षम बनाएगा. तर्क दिया जा रहा है कि एआई नए अवसर भी पैदा करेगा और आईटी कंपनियां इस बदलाव से लाभ उठा सकती हैं. एआई मौजूदा बिजनेस मॉडल के भीतर ही काम करेगा, जहां आईटी सर्विस प्रदाताओं की भूमिका बनी रहेगी
                                    मै पिछले दिनों से ए. आई. का इस्तेमाल कर रहा हूँ और दावे के साथ कह सकता हूँ कि कि एआई किसी ‘मैजिक बॉक्स’ की तरह अकेले काम नहीं कर सकता. उसे डेटा सिस्टम, ऑडिट चेक्स, साइबर सुरक्षा और रिस्क कंट्रोल जैसे मजबूत ढांचे के साथ ही असली मानवीय मेधा की जरूरत होती है, जिसमें आईटी वेंडर्स और एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म की अहम भूमिका होती है.ए. आई का दबाब कहिये या डर दुनिया की प्रमुख आईटी कंपनियां अब ए. आई. को लेकर सैद्धांतिक चर्चा से आगे बढ़कर व्यावहारिक बदलाव कर रही हैं. वे अपने ऑपरेशंस में एआई कोडिंग असिस्टेंट, ऑटोमेशन टूल्स और एआई एजेंट्स का तेजी से इस्तेमाल कर रही हैं, ताकि उत्पादकता बढ़ाई जा सके और डिलीवरी टाइम कम किया जा सके. देखिए आगे होता है क्या?
श्री राकेश अचल  ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश

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