सम्पादकीय

राजनीति या धर्मनीति विवादित बयान का फार्मूला सुपरहिट

यकीन मानिये इस समय देश में देश में दो ही मुददे लगातार चर्चाओं में बने हुए है एक राजनीति और दूसरा धर्मनीति जिस प्रकार प्रत्येक राजनैतिक दल अपने अपने दल की दलीलों को लेकर जनता को बरगलाने में कोई कसर नहीं छोड़ता उसी प्रकार धर्म के झंडाबरदार भी अपने भक्तों के सामने जो दलीलें देते है उनसे किसी का भला हो या न हो लेकिन हल्ला जरूर हो जाता है और यही आज के वायरल युग की सबसे बड़ी जरूरत बनती जा रही है । विवादित बयान देकर जिस प्रकार सुर्खिया बटोरने की कला का चलन बढ चला है उसके नफा नुकसान का अनुमान शायद ही कभी राजनैतिक या धार्मिक बयानबीरों को होता होगा समाज में उनके द्धारा बोली गई चंद पंक्तियों से कौन सा तानाबाना कितना कमजोर हो उन्हे इससे भी कोई मतलब नहीं उन्हे तो मतलब है जनता के ठहाकों और भक्तों के जयकारों से मैदान राजनीति का हो या धर्मनीति का दोनो ही जगह जनता को बस भक्त बनाने फैन फालोइंग बनाने की होड़ चल रही है ।

विवादित बयानों का इतिहास तो लंबा है लेकिन ताजा बयानों में देश की सबसे पुरानी पार्टी के अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर दिया गया आपत्तिजनक बयान बेहद संवेदनाहीन है जहां भरे मंच से अपने ही प्रधानमंत्री की व्यक्तिगत आलोचना करना और उसे सांप जैसा जहरीला बताया जा रहा है यह बयान आज के राजनैतिक माहौल की विशुद्ध नफरती माहौल को दर्शाता है तो जबाब में भाजपा के बयानबीरों का भारतीय राजनीति में अहम योगदान और महत्व रखने वाली सोनिया गांधी के खिलाफ दिये बयान भी घृणित ही है । लेकिन राजनेताओं को इन बयानों से ज्यादा इनके होने वाले असर की होती है और जुबान फिसलन के कारन हो या आवेग मनोभाव के कारन परिस्तिथिवस निकली लाइनों को बार बार जनता के सामने दोहराकर सभी उसका राजनैतिक लाभ लेना चाहते है और यह फार्मूला हिट भी है फिर चाहे गुजरात चुनाव में मौत का सौदागर हो या 2014 में चाय की दुकान सभी जगह मुद्दों से ज्यादा असरदायी बकर बयानी माने जाने लगी है और अब तो हर राजनैतिक दाल इस कला में पारंगत हो चूका है आम आदमी पार्टी पिछले एक महीने से देश को प्रधानमंत्री को कभी अडानी का नौकर कहती है तो कभी चौथी पास अनपढ़ सभी जानते है की जनता के बीच ये अमर्यादित शब्द जितनी तेजी से पहुंचेंगे मुद्दों की गति और ताकत उतनी नहीं है ।

इन सबसे इतर धर्म के मैदान में इन दिनों अलग ही कम्पटीशन चल रहा है वैराग्य और सांसारिक विरक्ति का भाव जगाने वाले सनातनी संत परम्परा में नए मठाधीशों का अपना ही सोशल नेटवर्क बना हुआ है और वह इतना तगड़ा है की सभी आमो  खास इनके दरबार में नतमस्तक है, अपने दिब्य दरबार के चमत्कारों और प्रचारतंत्र के नमस्कारों से लोकप्रिय युवा संत बागेश्वर धाम पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान लगातार सुर्खियों में बने रहते है ताजा मामले में उन्होने सहस्त्रबाहु और परशुराम के द्धंद का वर्णन कर पहले समाज में खलबली मचाई फिर आराम से खेद जता दिया पहले भी वे कई बार बेतरतीब बयानबाजी देकर माफी मांग चुके है लेकिन विवादित बयानों की छौंक एक एंसा वायरल चस्का है जो हजार काम की बातों  से ज्यादा असरदायक साबित होता है पूरे देश में समाज विशेष के लोग शास्त्री जी के खिलाफ एफआइआर दर्ज कराने के मांग कर रहे है और सोशल मीडिया अपना काम कर रहा है । एक बात और शास्त्री जी को अतिप्रिय है वह है भारत का हिंदू राष्ट्र हो जाना उनकी ही तरह बहुत से देशप्रेमियों को यह बात जचती है लेकिन किसी केे भी पास इन बातों का जबाब नहीं कि हिंदू राष्ट्र होने से बदल क्या जायेगा , देश की सामाजिक , आर्थिक परिस्तिथि में क्या चमत्कार हो जायेगा ? क्या फिर संविधान के नियम कानून लागू माने जायेंगे या फिर जो हिंदू धर्म स्वीकार नहीं करेगा उसे मार मार मुसलमान की तर्ज पर मार मार हिंदू बनाया जायेगा . अरे भाई कोई रोडमेप भी तो बताओ किहिंदू राष्ट्र बनने से यह हो जायेगा और इन समस्याओं को एंसे हल निकल जायेगा खैर आज के भक्ति युग में तर्क देना या तर्क लेना दोनो ही बड़े खतरनाक है क्योकि भक्त राजनैतिक हो या धार्मिक सीधे आक्रमण कर देते है और मंचाशीन तो खेद जता भी देते है ये तो खेद भी नहीं जताते ।

अभिषेक तिवारी 

संपादक भारतभवः 

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