बॉलीवुड

संजय दत्त @ 67 : गलतियों से गिरकर, संघर्ष से उठकर सुपरस्टार बनने की कहानी

भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जिनकी पहचान केवल उनकी फिल्मों से नहीं, बल्कि उनके संघर्षों से भी बनती है। संजय दत्त उन्हीं चुनिंदा अभिनेताओं में से एक हैं। आज जब वे 67 वर्ष के हो चुके हैं, तो उनका जीवन केवल एक अभिनेता की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि उतार-चढ़ाव, विवाद, दर्द, पुनर्जन्म और अदम्य इच्छाशक्ति का जीवंत उदाहरण भी है।एक समय ऐसा भी था जब लोग कहते थे कि संजय दत्त का करियर खत्म हो चुका है। लेकिन हर बार उन्होंने अपने जीवन को नई शुरुआत दी और साबित किया कि इंसान की पहचान उसकी गलतियों से नहीं, बल्कि उनसे बाहर निकलने की क्षमता से होती है।

स्टार परिवार में जन्म, लेकिन संघर्ष बचपन से

29 जुलाई 1959 को मुंबई में जन्मे संजय दत्त को अभिनय विरासत में मिला। उनके पिता सुनील दत्त भारतीय सिनेमा के महान अभिनेता और बाद में केंद्रीय मंत्री रहे, जबकि मां नर्गिस हिंदी फिल्मों की सबसे प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।ऐसे परिवार में जन्म लेने वाला बेटा निश्चित रूप से स्टार बन सकता था, लेकिन किस्मत ने उसके लिए आसान रास्ता नहीं चुना।1981 में फिल्म रॉकी से संजय दत्त ने बॉलीवुड में कदम रखा। फिल्म रिलीज हुई, लेकिन उसी समय मां नर्गिस का निधन हो गया। सफलता की खुशी मातम में बदल गई और यहीं से संजय दत्त का जीवन भटकने लगा।

नशे की गिरफ्त में खोता हुआ सितारा

कम उम्र में ही संजय दत्त ड्रग्स की लत का शिकार हो गए। हालत इतनी बिगड़ी कि उन्हें अमेरिका के एक पुनर्वास केंद्र (Rehabilitation Center) भेजना पड़ा।उन्होंने बाद में कई इंटरव्यू में स्वीकार किया कि नशे ने उनका जीवन लगभग खत्म कर दिया था।लेकिन यहीं से उनके संघर्ष का दूसरा अध्याय शुरू हुआ।उन्होंने नशे को हराया और खुद को दोबारा खड़ा किया। फिल्मों में वापसी और और अपना एक अलग मुकाम बनाया ।

1980 और 1990 के दशक में संजय दत्त ने कई सफल फिल्में दीं।

  • नाम
  • सड़क
  • साजन
  • खलनायक
  • वास्तव
  • दुश्मन
  • हसीना मान जाएगी

विशेष रूप से ‘खलनायक’ ने उन्हें सुपरस्टार बना दिया। उनका संवाद, स्टाइल और स्क्रीन प्रेजेंस युवाओं के बीच जबरदस्त लोकप्रिय हुआ।

1993 बम धमाके और सबसे कठिन दौर

संजय दत्त के जीवन का सबसे विवादित अध्याय 1993 मुंबई बम धमाकों के बाद शुरू हुआ उन पर अवैध हथियार रखने का आरोप लगा वर्षों तक अदालतों में मुकदमा चला उन्हें जेल भी जाना पड़ा।इस दौरान उनका फिल्मी करियर कई बार रुका, लेकिन जनता का एक बड़ा वर्ग उनके साथ खड़ा रहा। यह दौर उनके लिए मानसिक, सामाजिक और आर्थिक रूप से बेहद कठिन था।

जेल से वापसी और ‘मुन्नाभाई’

बहुत कम कलाकार होते हैं जो जेल से लौटकर फिर सुपरस्टार बनते हैं संजय दत्त ने यह कर दिखाया। मुन्नाभाई एमबीबीएस और लगे रहो मुन्नाभाई ने उन्हें नई पहचान दी। ‘जादू की झप्पी’ और ‘गांधीगिरी’ जैसे शब्द भारतीय समाज का हिस्सा बन गए। यह केवल फिल्म नहीं थी, बल्कि संजय दत्त के जीवन की भी नई शुरुआत थी।

निजी जिंदगी के उतार-चढ़ाव

संजय दत्त का निजी जीवन भी हमेशा चर्चा में रहा।

  • मां का निधन
  • पहली पत्नी ऋचा शर्मा की मृत्यु
  • दूसरी शादी का टूटना
  • कानूनी लड़ाइयाँ
  • जेल
  • कैंसर जैसी गंभीर बीमारी

हर संकट के बाद वे फिर उठे 2020 में जब उन्हें फेफड़ों के कैंसर का पता चला, तब भी उन्होंने इलाज करवाकर बीमारी को मात दी।

                                               67 वर्ष की उम्र में भी संजय दत्त लगातार फिल्मों में सक्रिय हैं। अब वे केवल हीरो नहीं बल्कि दमदार चरित्र अभिनेता और खलनायक की भूमिकाओं में भी नई पहचान बना चुके हैं। हिंदी के अलावा दक्षिण भारतीय फिल्मों में भी उनकी लोकप्रियता लगातार बढ़ी है। संजय दत्त केवल एक अभिनेता नहीं हैं। वे भारतीय सिनेमा के उन दुर्लभ कलाकारों में हैं जिनकी कहानी पर्दे से कहीं अधिक प्रभावशाली उनके वास्तविक जीवन में दिखाई देती है। एक ऐसा व्यक्ति जिसने शोहरत देखी, बर्बादी देखी, जेल देखी, बीमारी देखी और फिर भी मुस्कुराते हुए वापस लौट आया। 67वें जन्मदिन पर संजय दत्त को भारतभवः की ओर से हार्दिक शुभकामनाएँ।

“कुछ किरदार फिल्मों में निभाए जाते हैं… और कुछ पूरी जिंदगी खुद इंसान बन जाता है। संजय दत्त की कहानी उसी दूसरे प्रकार की कहानी है।”

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