प्रेरणा

योग दिवस – 6 वर्ष की नन्ही योग प्रशिक्षक प्रकृति बनी प्रेरणा का स्रोत

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर आयोजित विशेष कार्यक्रम में 6 वर्षीय प्रकृति तिवारी ने अपनी प्रतिभा, अनुशासन और योग के प्रति समर्पण से सभी का ध्यान आकर्षित किया। प्रकृति ने 95 वर्षीय वरिष्ठ योग गुरु विष्णु आर्य के साथ मंच साझा करते हुए सैकड़ों लोगों को योगाभ्यास कराया और यह संदेश दिया कि योग की शुरुआत किसी भी उम्र में की जा सकती है।अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के पूर्व 20 जून को आयोजित एक अभ्यास एवं जागरूकता कार्यक्रम के दौरान प्रकृति तिवारी ने 95 वर्षीय वरिष्ठ योग गुरु विष्णु आर्य के साथ एक शैक्षणिक संस्थान में फार्मेसी एवं बी.एड. के विद्यार्थियों के समक्ष योगाभ्यास का प्रदर्शन किया। एक ओर 95 वर्ष की आयु में सक्रिय योग साधना कर रहे वरिष्ठ योग गुरु और दूसरी ओर 6 वर्षीय बालिका का योग के प्रति समर्पण उपस्थित विद्यार्थियों के लिए विशेष प्रेरणा का विषय बना। दोनों ने अपने उदाहरण से यह संदेश दिया कि योग की कोई आयु सीमा नहीं होती तथा इसे जीवन के किसी भी चरण में अपनाकर स्वास्थ्य, ऊर्जा और सकारात्मकता प्राप्त की जा सकती है।
                            प्रकृति लगभग 2 वर्षों से योग से जुड़ी हुई है, हालांकि प्रारंभिक अवधि में उसका अभ्यास कभी-कभी ही होता था। लेकिन पिछले 286 दिनों से उसने एक भी दिन का गैप, अवकाश या ब्रेक नहीं लिया है और प्रतिदिन नियमित रूप से योगाभ्यास कर रही है। वर्तमान में वह बिना रुके 12 सेट सूर्य नमस्कार (लगभग 144 आसन) सहजता से पूर्ण कर लेती है। उसका व्यक्तिगत रिकॉर्ड लगातार 45 सेट सूर्य नमस्कार (लगभग 540 आसन) बिना रुके पूर्ण करने का है, जो उसकी आयु के हिसाब से एक उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।नियमित योगाभ्यास का सकारात्मक प्रभाव उसकी पढ़ाई और दिनचर्या पर भी स्पष्ट रूप से दिखाई देता है। विद्यालय में उसकी 100 प्रतिशत उपस्थिति रही है तथा उसे बेस्ट अटेंडेंस का सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। उसका ऊर्जा स्तर अत्यंत उत्कृष्ट बना हुआ है और वह अपने दैनिक कार्य पूरे उत्साह के साथ करती है।प्रकृति की जीवन यात्रा भी प्रेरणादायक रही है। कोविड काल के दौरान जब उसकी माता साक्षी तिवारी गंभीर रूप से कोविड संक्रमण से ग्रसित हुई थीं और उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट की आवश्यकता पड़ी थी, तब लगभग 2 वर्ष की आयु में प्रकृति को भी उनके साथ अस्पताल और आईसीयू में रहना पड़ा था। उस समय स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों के कारण यह कल्पना करना भी कठिन था कि यही बालिका आगे चलकर इतनी शारीरिक क्षमता विकसित कर पाएगी। आज नियमित योगाभ्यास, संतुलित एवं ऑर्गेनिक जीवनशैली तथा अनुशासित दिनचर्या के कारण वह लगातार 540 आसन बिना रुके करने में सक्षम है। आने वाले वर्षों में उम्र और अनुभव के साथ इस उपलब्धि को और आगे बढ़ाने का उसका लक्ष्य है।
                                परिवार में योग की यह परंपरा केवल प्रकृति तक सीमित नहीं है। उसकी माता साक्षी तिवारी तथा 4 वर्षीय छोटी बहन नियति तिवारी भी नियमित रूप से योगाभ्यास करती हैं। पूरा परिवार प्रतिदिन सामूहिक रूप से योग कर स्वस्थ एवं अनुशासित जीवनशैली को अपनाने का प्रयास कर रहा है। इस प्रकार तिवारी परिवार समाज के समक्ष “फैमिली योग” का एक प्रेरणादायक उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है, जहाँ परिवार के सभी सदस्य योग को अपनी दैनिक दिनचर्या का हिस्सा बनाकर स्वास्थ्य, सकारात्मकता और पारिवारिक एकता को मजबूत कर रहे हैं।आज के समय में जब अधिकांश बच्चे मोबाइल, जंक फूड और स्क्रीन की आदतों से प्रभावित हो रहे हैं, वहीं प्रकृति अनुशासित दिनचर्या, नियमित योग और स्वस्थ जीवनशैली का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आई है। वह जंक फूड, बिस्किट, कुरकुरे, टॉफी, नमकीन आदि से दूर रहती है तथा मोबाइल स्क्रीन का उपयोग भी नहीं करती।
कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने प्रकृति के आत्मविश्वास, ऊर्जा और योग के प्रति समर्पण की सराहना की। वरिष्ठ योग गुरु विष्णु आर्य ने भी उसकी निरंतरता और अनुशासन को आने वाली पीढ़ी के लिए प्रेरणादायक बताया।
प्रकृति के पिता महेश तिवारी स्वयं योग प्रशिक्षक, साईकलिस्ट, इंग्लिश भाषा के शिक्षक, पर्यावरणविद, समाजसेवी हैं। कोविड महामारी के दौरान तत्कालीन कलेक्टर आईएएस दीपक सिंह के निर्देशन में उन्होंने ज्ञानोदय कोविड सेंटर सहित अन्य कोविड देखभाल केंद्रों में जाकर कोविड मरीजों को योग एवं प्राणायाम का प्रशिक्षण दिया। उनकी पत्नी साक्षी तिवारी भी कोविड संक्रमण के दौरान गंभीर रूप से प्रभावित हुई थीं। उस कठिन समय में चिकित्सकीय उपचार, नियमित प्राणायाम, योगाभ्यास तथा सकारात्मक मनोबल के सहयोग से उन्होंने स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किया। यह अनुभव समाज के सामने योग और प्राणायाम की उपयोगिता का प्रेरणादायक उदाहरण बनकर उभरा।
महेश तिवारी का मानना है कि योग केवल एक व्यायाम नहीं, बल्कि स्वस्थ, अनुशासित और सकारात्मक जीवन जीने की सम्पूर्ण जीवनशैली है। उनका कहना है कि यदि बच्चों को प्रारंभ से ही योग, संतुलित आहार और अच्छे संस्कारों से जोड़ा जाए तो वे शारीरिक, मानसिक और सामाजिक रूप से अधिक सक्षम बन सकते हैं।
अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस पर प्रकृति तिवारी की सहभागिता केवल एक प्रस्तुति नहीं थी, बल्कि यह संदेश भी था कि योग की कोई आयु सीमा नहीं होती। 95 वर्षीय वरिष्ठ योग गुरु विष्णु आर्य और 6 वर्षीय बालिका का एक साथ मंच पर योग सिखाना पीढ़ियों को जोड़ने वाला प्रेरक दृश्य बन गया। प्रकृति का सपना है कि योग के माध्यम से सागर को राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई जाए तथा अधिक से अधिक लोगों को स्वस्थ, सकारात्मक और अनुशासित जीवन के लिए प्रेरित किया जाए।

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