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बाबाओं का आत्मज्ञान यानि प्रशस्तिगान

बाबा किसी भी तरह के हों उनके आत्मज्ञान की कोई सानी नहीं है. खुदा न खास्ता यदि बाबाओं को राजनीति का चस्का लग जाए तो वे भगवान से ज्यादा नेताओं कोई स्तुति करने लगते हैं .नेताओं की स्तुति-गान की ये परम्परा बहुत पुरानी है .कांग्रेस के जमाने से शुरू हुई ये परम्परा मोदी युग में चरम पर पहुँच चुकी है .अब हिन्दू विचारधारा के भाजपा समर्थक बाबा ही नहीं बल्कि धर्मनिरपेक्षता और कांग्रेस समर्थक बाबा भी नेताओं की स्तुति में पीछे नहीं हैं .इस परम्परा में नया नाम कांग्रेस समर्थक बाबा प्रमोद कृष्णम का जुड़ा है .. प्रमोद कृष्णम ने भी प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी को देवीय अवतार मान लिया है. प्रमोद जी की ये धारणा एक दिन में नहीं बनीं .इसे बनने में पूरा एक दशक लगा ,लेकिन प्रकट होने में एक पल भी नहीं लगा. बाबा जी अपने ‘कल्किधाम’ के शिलान्यास का निमंत्रण पत्र लेकर प्रधानमंत्री जी के पास गए थे .उनसे मिलने के बाद बाबा जी के स्वर एकदम बदल गए .बाबा जी उसी बिहार से आते हैं जिस बिहार से पल्टूराम के नाम से चर्चित हुए नीतीशकुमार आते हैं .नीतीश कुमार के राज्य के होने का अर्थ ये नहीं है की हर बिहारी पल्टूराम होता है.बिहार में जयप्रकाशनारायण भी होते हैं .वैसे बाबाजी की उतपति को लेकर विवाद है .कोई उन्हें उत्तरप्रदेश का उत्तरदाई बाबा मानता है . बहरहाल बाबा प्रमोद कृष्णम को मोदी जी के प्रति भक्तिभाव दर्शाने के फौरन बाद कांग्रेस से निलंबित कर दिया गया .कांग्रेस को ये काम बहुत पहले करना चाहिए था ,लेकिन कांग्रेस लगता है जरा संकोची पार्टी है. हर पल्टूराम को पूरा वक्त देती है ,सुधरने का . प्रमोद कृष्णम को भी दिया. प्रमोद कृष्णम एक लम्बे अरसे से सार्वजनिक रूप से कांग्रेस की लीक से हटकर बातें कर रहे थे. वे कांग्रेस के ‘ सुपर आलोचक ‘ भी बन गए थे. उन्हें कांग्रेस नेतृत्व पर हमले करने में रस आने लगा था .और जब वे पहली मर्तबा मोदी जी से मिले तो उनका हृदय परिवर्तन ही हो गया और उन्होंने भी मोदी जी को आम भाजपा कार्यकर्ताओं की भांति देवीय अवतार मान लिया . बाबाओं की जरूरत हर राजनीतिक दल को होती है. कांग्रेस को भी थी. कांग्रेस ने प्रमोद कृष्णम को 2014 और 2019 में लखनऊ लोकसभा सीट से चुनाव भी लड़ाया लेकिन सांसद बनना उनके नसीब में नहीं था .प्रमोद जी भगवावस्त्रधारी बाबा नहीं है. वे धवल वस्त्र पहनते हैं और कल तक धर्मनिरपेक्षता की बात करते हैं .भगवत कृपा से पिछले एक दशक में भाजपा की सरकार ने उनके पीछे ईडी या सीबीआई नहीं लगाईं ,क्योंकि वे कल्कि आश्रम चलते हैं .कल्कि आश्रम तो देश में एक और बाबा चलते थे ,वे बलात्कार के आरोप में फंसने के बाद से अंतर्ध्यान हो गए लेकिन प्रमोद कृष्णम का कल्कि आश्रम अब सुर्ख़ियों में हैं ।

गठबंधन सरकारें तोड़ने,गिराने में सिद्धहस्त भाजपा ने साल के शुरू में ही लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस के एक बाबा को भी तोड़ लिया. अब बाबाओं के मामले में कांग्रेस भाजपा के मुकाबले बहुत कंगाल है . आप कह सकते हैं कि कांग्रेस के नेताओं को भाजपा सरकार ने पिछले एक दशक में खुद बाबा बना दिया है .बेचारे वे खुद राम-राम जपते फिर रहे हैं .प्रमोद कृष्णम के कांग्रेस से बाहर फेंके जाने के बाद नुक्सान होगा या फायदा ,इस बात पर बहस करने का कोई अर्थ नहीं है ,क्योंकि बाबा प्रमोद कृष्णम कांग्रेस के लिए एक खोटे सिक्केपहले ही साबित हो चुके हैं. कांग्रेस ने उन्हें दो बार मौक़ा दिया लेकिन वे एक बार भी लोकसभा का चुनाव नहीं जीत पाए .यानि उनका कोई जनाधार नहीं है . बहरहाल बाबा के कांग्रेस से जाने के बाद भाजपा के ‘ डस्टबिन ‘ में एक नया नाम और जुड़ गया है .बाबा प्रमोद कृष्णम से मै शुरू से बहुत प्रभावित रहा हूँ . लेकिन अचानक उनके सुर बदलने से मेरी भी धारणा बदल गयी है. मुझे लगता था कि बाबाओं के सुर अचानक नहीं बदलते,लेकिन मुझे लगता है कि मै कदाचित गलत था ,गलत हूँ,क्योंकि बाबाओं के सुर तो कभी भी बदल जाते हैं .धर्मध्वजाएं उठाने वाले तमाम बाबा आज भी भाजपा के साथ हैं ,क्योंकि भाजपा अकेली पार्टी है जो धर्म की राजनीति खुल्ल्म-खुल्ला करती है. भाजपा ने राम मंदिर के निर्माण को भी धड़ल्ले से अपनी एक दशक की उपलब्धियों में शुमार कर लिया है .इस दुस्साहस के लिए मै भाजपा का भी प्रशंसक हूँ .हर पार्टी में इतना दुस्साहस होना चाहिए . इस तिमाही में होने वाले लोकसभा चुनाव में ‘ मिशन -400 ‘ हासिल करने के लिए भाजपा को मोदी जी के चेहरे के अलावा बाबा ही नहीं बैरागी भी चाहिए .उनकी भर्ती का अभियान बहुत पहले से शुरू हो चुका था. भाजपा ने 2020 मध्यप्रदेश में कांग्रेस के ‘ बाबा’ यानि ज्योतिरादित्य सिंधिया को भाजपा में शामिल करके संकेत दे दिया था उसे किसी भी कांग्रेसी से गुरेज नहीं है .कांग्रेसी से कोई भी दल गुरेज नहीं कर सकता ,क्योंकि कांग्रेसी बल्दियत बदलने के मामले में बड़े उदार माने जाते हैं .ये तो राजस्थान के सचिन पायलट हैं जो अभी तक भाजपा के विमान में सवार नहीं हुए अन्यथा उनके पास भी भाजपा का ऑफर लंबित है . आचार्य प्रमोद कृष्णम के कांग्रेस छोड़ने और निकट भविष्य में भाजपा में शामिल होने या भाजपा को कल्कि आश्रम के बाहर खड़े होकर समर्थन देने से भारतीय राजनीति की दशा और दिशा बदलने वाली नहीं है .देश के चार शंकराचार्यों के मोदी विरोधी होने के बाद भी देश कोई दशा और दिशा नहीं बदली .कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा से नहीं बदली .इसे बदलने के लिए कोई अकेले सक्षम नहीं है. ये महान कार्य केवल और केवल देश की जनता कर सकती है किन्तु उसने भी दस साल में जनादेश की धज्जियां उड़ते देख राजनीतिक दलों को जनादेश देने में दिलचस्पी लेना कम कर दिया है .आखिर जनादेश से किसी सरकार को चुनने का लाभ ही क्या ? जबकि भाजपा उसे जब चाहे तब गिरा दे या जब चाहे तब अपने कहते में दर्ज कर ले ।

राकेश अचल जी ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक विश्लेषक 

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