मध्यप्रदेश और बुंदेलखंड की राजनीति के गुरू माने जाने वाले कददावर भाजपा नेता और केबिनेट मंत्री पंडित गोपाल भार्गव इन दिनो दो वजहो से चर्चाओं में बने हुए है पहला कारण है कि मध्यप्रदेश में महत्वपूर्ण माने जाने वाले 2023 के विधानसभा चुनावों के संचालन और प्रबंधन की जो समितियां गठित की गई है उनमें अपराजेय माने जाने वाले भार्गव को स्थान नहीं मिला है जबकि कई नये और कम अनुभवी नेताओं को चुनाव प्रबंधन समिति में स्थान दिया गया है जिससे मध्यप्रदेश के राजनैतिक गलियारों में भार्गव को चनाव अभियान से दूर रखने के पीछे के कारणो और उन्हे आगे बढने से रोकने की अटकल जोरो पर है और भार्गव की चर्चाआंे को लेकर जो दूसरा कारण है वह है 72 साल के भार्गव द्धारा हाल ही में दिखाये जाने वाले कसरती करतब अपने बेबाक बयानी के लिये पहचाने जाने वाले भार्गव इन दिनो अपनी शारीरिक फुर्ती को लेकर सुर्खियां बटोर रहे है कभी मुहर्रम के जुलूस में तलवार बाजी करते हुए दिखाई देते है तो कभी अखाड़े में मुगदर घुमाते है अब इसके पीछे भार्गव किसको क्या संदेश देना चाहते है यह तो वही जाने लेकिन आठ बार के विधायक गोपाल भार्गव रहली विधानसभा से इस बार फिर मैदान में ताल ठोक चुके है और वो भी गुरू के आदेश के साथ।
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