दिल्ली में आम आदमी पार्टी की करारी हार हुई है लेकिन इस हार के बाद भी कुछ तथ्य एसे है जो पार्टी को अब भी मजबूत बताते है। मसलन दिल्ली में 12 साल सरकार रहने के बाद भी आप ने लगभग 44 प्रतिशत वोट हांसिल किये जो एक बडी उपलब्धि है । और दूसरी बात यह है कि आप ने जो वोट हासिल किये है उनमे से बडा हिस्सा गरीब और पिछडे समुदाय का है । मध्यमवर्ग और धनी वर्ग में जरूर पार्टी के प्रति सर्मथन कम हुआ है। और जिन योजनाओं को रेवडी कल्चर का नाम देकर आम आदमी पार्टी की आलोचना की गई उससे मुकाबला करने के लिये भाजपा और कांग्रेस को भी उन्ही योजनाओं का सहारा लेना पड़ा । कुलमिलाकर आम आदमी पार्टी की हार जरूर हुई है लेकिन राजधानी में उसका एक मजबूत आधार अभी भी बरकरार है।
भारतीय मुहावरे और कहावतें मुझे सिर्फ इसीलिए पसंद हैं क्योंकि वे सटीक भी लगती हैं…
1955 में मिसरिख (सीतापुर) के तरही मुशायरे की सदारत एक सूरत सीलदार कर रहे थे…
आज के दौर में अपराध की हदें रोज एक नया रिर्काड सा बनाती हुई लगती…
मै बंगाल भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सामिक भट्टाचार्य का मुरीद हो गया हूँ. सामिक भाजपा…
ज़रा एक क्षण के लिए उन लाखों बच्चों की मनःस्थिति की कल्पना कीजिए जिन्होंने इस…
भारत को खतरा कोकरोच से ज्यादा पड रही प्रचंड गर्मी से है. लेकिन इसकी चर्चा…