अपराध

34 साल बाद सिद्धू को 1 साल की जेल की सजा

कांग्रेस पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व सांसद नवजोत सिंह सिद्धू को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। सर्वाेच्च अदालत ने अपना पुराना फैसला बदलते हुए 34 साल पुराने एक मामले में सिद्धू को सजा सुना दी है। सर्वाेच्च अदालत ने सिद्धू को एक साल की बामशक्कत कैद की सजा सुनाई है। कोई 34 साल पहले रोड रेज और पार्किंग के दौरान हुई बहस की एक की एक घटना में एक बुजुर्ग व्यक्ति गुरनाम पर सिद्धू ने हमला कर दिया था।  जिसमें बुजुर्ग की जान चली गई थी। इस मामले में निचली अदालत ने सिद्धू को बरी कर दिया था लेकिन हाई कोर्ट ने तीन साल की सजा दी थी।

बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सिद्धू को एक हजार रुपए का जुर्माना लगा कर छोड़ दिया था। लेकिन चार साल बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपना ही फैसला बदल दिया और सिद्धू को एक साल की सजा सुनाई। इस मामले में उनको जेल जाना पड़ सकता है।  गुरुवार को फैसले के समय सिद्धू महंगाई विरोधी एक कार्यक्रम में शामिल थे और सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के मात्र आठ मिनिट पहले ही सिद्धू ने महंगाई के खिलाफ हांथी की सवारी करते हुए अपनी एक फोटो शेयर की थी और ठीक आठ मिनिट बाद दो बजे सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ गया। पहले चर्चा थी कि वे गुरुवार को ही सुप्रीम कोर्ट में सरेंडर करेंगे। इसलिए वे अमृतसर जाते हुए आधे रास्ते से पटियाला लौट आए थे। अब कहा जा रहा है कि उनके वकीलों ने उनको सजा के खिलाफ सुधारात्मक याचिका दायर करने की सलाह दी है। यह याचिका दायर होने के बाद ही उनके सरेंडर करने का फैसला होगा। हालांकि कानूनी जानकारों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट ने चार साल पुराना अपना फैसला बदल कर उनको सजा दी है तो उनको जेल जाना होगा।

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद सिद्धू ने ट्विट करके कहा कि उन्हें कानून का फैसला स्वीकार है। इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 24 पन्नों के अपने फैसले में संस्कृत का एक श्लोक लिखा है और कहा है कि प्राचीन धर्म शास्त्र भी कहते रहे हैं कि पापी को उसकी उम्र, समय और शारीरिक क्षमता के मुताबिक दंड देना चाहिए। दंड ऐसा भी नहीं हो कि वो मर ही जाए, बल्कि दंड तो उसे सुधारने और उसकी सोच को शुद्ध करने वाला हो। पापी या अपराधी के प्राणों को संकट में डालने वाला दंड नहीं देना उचित है।

सुप्रीम कोर्ट ने चार साल पुराना अपना फैसला बदलते हुए कहा. हल्की सजा अपराध के पीड़ित को अपमानित और निराश करती है। सिर्फ जुर्माना लगा कर सिद्धू को कोई और सजा न देने का रहम दिखाने की जरूरत नहीं थी। गौरतलब है कि सिद्धू के खिलाफ रोड रेज का मामला साल 1988 का है। सिद्धू का पटियाला में पार्किंग को लेकर 65 साल के गुरनाम सिंह नामक बुजुर्ग व्यक्ति से झगड़ा हो गयाए जिसमें सिद्धू ने कथित तौर पर गुरनाम सिंह को मुक्का मार दिया। बाद में गुरनाम सिंह की मौत हो गई। सिद्धू के ऊपर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज हुआ था।

Share this...
bharatbhvh

Recent Posts

सुरखी मेरा परिवार, परिवार के हर सदस्य का विकास करना मेरा संकल्प- गोविंद सिंह

ग्राम सोठिया, बरौदासागर और हिन्नोद में मंत्री राजपूत ने किया 15 करोड़ के विकास कार्यों…

1 hour ago

DTAB प्रस्ताव के खिलाफ एमपी फार्मासिस्ट एसोसिएशन का ज्ञापन

केंद्र सरकार से सिफारिश निरस्त करने और होलसेल दवा लाइसेंस में फार्मासिस्ट की अनिवार्यता की…

1 hour ago

तीन दशक का इंतजार खत्म,अब 33% भागीदारी का रास्ता साफ –  सांसद वानखेड़े

 सागर संसद में सागर लोकसभा क्षेत्र की सांसद डॉ. लता वानखेड़े ने संविधान संशोधन विधेयक, संघराज्य क्षेत्र…

1 hour ago

क्रॉस वोटिंग रोकने कांग्रेस की कोशिशें हुई तेज

जिस तरह से भाजपा खेमे से चर्चा चल पड़ी है कि वह प्रदेश की राज्यसभा…

1 day ago

महिलाओं को आरक्षण पर भाजपा कांग्रेस में ठनी

संसद में महिला आरक्षण बिल को सभी दलों का सर्मथन प्राप्त है फिर भी इसमें…

3 days ago

डॉ भीमराव अम्बेडकर – एक आदर्श विचारधारा

“शिक्षित बनो, संघटित रहो, संघर्ष करो“ डॉ. भीमराव अम्बेडकर (प्रचलित नाम: बाबासाहेब अम्बेडकर) भारतीय इतिहास…

4 days ago