भारतीय जनता पार्टी की तरफ से उमा भारती और कैलाश जोशी ने दिग्विजय सिंह के खिलाफ 22 अगस्त 2003 को एक आरोप पत्र जारी किया। इस आरोप पत्र में दिग्विजय सिंह को मध्यप्रदेश का “सत्यानाश” करने वाला बताया गया। नाम दिया गया “मिस्टर बंटाढार”। यही शब्द बाद में पूरे चुनाव प्रचार का आधार बना। यह शब्द इतना लोकप्रिय हुआ कि सागर के एक पत्रकार बाबूलाल जैन ने अपने साप्ताहिक समाचार पत्र का नाम ही रख दिया ‘बंटाढार’। इसी समय उमा भारती ने “गाँव चलो घर चलो” अभियान की भी शुरुआत की। आरोप पत्र में दिग्विजय सिंह पर 15 हजार करोड़ के घपले-घोटालों के आरोप लगाये गये। इसके खिलाफ दिग्विजय सिंह ने उमा भारती और तब के पार्टी अध्यक्ष कैलाश जोशी पर कोर्ट में मानहानि का मुकदमा दायर कर दिया। इस मुकदमे को लड़ने के लिए तत्कालीन एडव्होकेट जनरल विवेक तन्खा ने चुनाव से बीस दिन पहले अपने पद से इस्तीफा दिया। तन्खा दिग्विजय सिंह की तरफ से केस लड़ने भोपाल की अदालत में विशेष तौर पर आये। यह मुकदमा आने वाले पन्द्रह सालों तक चलता रहा। आरोप पत्र में जो आरोप लगाये गये थे वे यह पुस्तक लिखे जाने तक भारतीय जनता पार्टी सिद्ध नहीं कर पाई थी।
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