देश में इन दिनों नै बहस है कि क्या पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना देश के लिए फायदे का सौदा है या आम आदमी की गाड़ी के लिए नया जोखिम?भारत सरकार पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ा रही है। इसका मकसद है—विदेशों से कच्चे तेल का आयात कम करना, किसानों को गन्ने और मक्के जैसी फसलों का बेहतर दाम दिलाना और प्रदूषण में कमी लाना।लेकिन दूसरी तरफ कई वाहन विशेषज्ञों और उपभोक्ताओं का कहना है कि अधिक एथेनॉल वाले ईंधन से पुराने वाहनों के इंजन, रबर पाइप और माइलेज पर असर पड़ सकता है। वहीं कुछ लोग यह सवाल भी उठा रहे हैं कि जब खाद्य फसलों का इस्तेमाल ईंधन बनाने में होगा, तो क्या इसका असर खाद्य कीमतों और जल संसाधनों पर पड़ेगा?
सरकार का कहना है कि एथेनॉल ब्लेंडिंग से देश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने में मदद मिलेगी और करोड़ों रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत होगी। वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति के साथ तकनीकी तैयारी, वाहन निर्माताओं की जिम्मेदारी और उपभोक्ताओं को सही जानकारी देना भी उतना ही जरूरी है।
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