भारतीय सनातन संस्कृति में जीवन का प्रथम सुख निरोगी काया यानि स्वस्थ शरीर को माना गया है । जीवन के सभी भोगों को भोगने के लिये एक स्वस्थ शरीर ही माध्यम होता है । भारतीयता में योग परंपरा का अस्तित्व भी मानव सभ्यता के विकास के साथ ही पाये जाते है योग में एंसे कई प्रकार के आसन होते है जो हमारे शरीर को पूर्ण रूप से न सिर्फ स्वस्थ रखते है बल्कि इनका नियमित अभ्यास हमारे जीवन मे सफलता के लिये महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है। तो चलिये सनातन संस्कृति के इस महान विज्ञान को हम चरणबद्ध तरीके से जानने और अपनी जीवनशैली में अपनाने का प्रयास करते है।
हमारा आज का आसन ज्ञान है – शीर्षाशन
शीर्षासन या योग शीर्षासन आधुनिक योग में व्यायाम के रूप में एक उल्टा आसन है इसे सभी आसनों का राजा कहा गया है।
शीर्षासन करने का तरीका
जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है शीर्षासन में हम अपने शरीर को उल्टा कर लेते है मतलब सिर को नीचे रख पैरो को उपर रखते है शीर्षासन में सबसे पहले आप अपने तलवों और हथेलियों को जमीन पर टिका लेेते है फिर दीवार के सहारे रखी योगा मैट पर अपने हाथों की उंगलियों को लॉक करके रख लें अपने सिर को दोनों हथेलियों के बीच रखें शीर्षासन करने के लिए अब पैरों को सिर के पास लाते हुए कमर और गर्दन को सीधा कर लें । इससे आपका शरीर उल्टा हो जावेगा प्रारंभ में इस आसन का प्रयोग करते समय दीवार का सहारा अवष्य लेना चाहिये फिर धीरे धीरे अभ्यास होने पर ही इसे बिना सहारे करना चाहिये । शीर्षासन को अधिकतम दो मिनिट तक करना चाहिये फिर धीरे धीरे अपने पैरों को मोड़ते हुए वापिस आना चाहिये।
शीर्षासन से हमारे शरीर को कई प्रकार के फायदे होते है जैसे इससे हमारी याददास्त तेज होती है, हार्निया की समस्या से छुटकारा मिलता है, मासपेशिया मजबूत होती है , बालों की समस्या से निजात और पाचनतंत्र और किडनी को मजबूत बनाता है।
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