लोकतंत्र-मंत्र

जंतर-मंतर जाने से रोकने की अपील क्यों?

दिल्ली पुलिस के कदम पर उठे सवाल

नई दिल्ली। लोकतंत्र में विरोध-प्रदर्शन का अधिकार है या पुलिस की अनुमति से ही जनता अपनी आवाज उठा सकती है? यह सवाल एक बार फिर चर्चा में है। वजह है दिल्ली पुलिस की वह अपील, जिसमें लोगों से 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए नहीं पहुंचने को कहा गया है।बताया जा रहा है कि दिल्ली पुलिस ने कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए यह अपील की है। जंतर-मंतर पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 लागू होने की बात भी कही जा रही है, जिसके तहत परिस्थितियों के अनुसार लोगों के जमावड़े पर प्रतिबंध लगाया जा सकता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या किसी संभावित कानून-व्यवस्था की समस्या के चलते प्रदर्शन में शामिल होने की अपील करके लोगों को पहले ही हतोत्साहित करना उचित है?

दरअसल, कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और वामपंथी छात्र संगठनों ने 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया है। प्रदर्शन का प्रमुख मुद्दा मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा है। सात अक्टूबर को CJP के मुख्य प्रवक्ता सौरव दास ने प्रेस क्लब में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर देशभर के लोगों से प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। इसके बाद दिल्ली पुलिस की अपील सामने आई और एक नई बहस शुरू हो गई।लोकतंत्र में पुलिस की जिम्मेदारी कानून-व्यवस्था बनाए रखना है। किसी प्रदर्शन के दौरान हिंसा, अव्यवस्था या सार्वजनिक सुरक्षा को खतरा पैदा होने की आशंका हो तो प्रशासन उचित कानूनी कदम उठा सकता है। लेकिन शांतिपूर्ण विरोध और कानून तोड़ने के बीच अंतर करना भी उतना ही जरूरी है।

आखिर असली सवाल क्या है?

क्या कानून-व्यवस्था की चिंता का समाधान लोगों को प्रदर्शन से दूर रहने की सलाह देना है, या फिर शांतिपूर्ण प्रदर्शन के लिए निर्धारित नियमों के तहत व्यवस्था बनाना? क्या प्रशासन प्रदर्शनकारियों से संवाद करके उनकी आवाज सुनने का रास्ता नहीं निकाल सकता?यह भी समझना जरूरी है कि किसी प्रदर्शन पर प्रतिबंध और लोगों से वहां नहीं जाने की अपील—दोनों की कानूनी स्थिति एक जैसी नहीं होती। इसलिए पुलिस की कार्रवाई या अपील का मूल्यांकन संबंधित आदेशों, प्रतिबंधों की वास्तविक शर्तों और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए।फिलहाल इस घटनाक्रम ने एक बुनियादी लोकतांत्रिक बहस को फिर सामने ला दिया है। लोकतंत्र की मजबूती केवल चुनाव कराने में नहीं, बल्कि असहमति की आवाज सुनने और शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार की रक्षा करने में भी है।अब देखना होगा कि 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर क्या स्थिति बनती है और प्रशासन कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ नागरिकों के लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन कैसे स्थापित करता है।

https://www.youtube.com/c/BharatbhvhTV?sub_confirmation=1

⇑ वीडियो समाचारों से जुड़ने के लिए  कृपया हमारे चैनल को सबस्क्राईब करें , धन्यवाद ।

Share this...
bharatbhvh

Recent Posts

मध्यप्रदेश – डिप्टी CM के OSD पर एक करोड़ लेने का आरोप

₹930 करोड़ की कथित धोखाधड़ी में नया मोड़!  भोपाल | भारतभवः न्यूज़ मध्य प्रदेश की…

23 mins ago

एलन मस्क का सवाल—क्या अंबानी हैं असली बॉस ?

भारत में स्टारलिंक की एंट्री पर एलन मस्क का सवाल—क्या अंबानी हैं असली बॉस? 165…

1 hour ago

जीएसटी कॉउंसिल की बैठक में व्यापारियों को राहत

नई दिल्ली: केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी काउंसिल की 53वीं…

1 hour ago

30 ग्राम स्मैक के साथ दो आरोपी गिरफ्तार, राजस्थान से जुड़ा सप्लाई नेटवर्क आया सामने

मध्यप्रदेश /सागर/देवरी सागर/देवरी। देवरी थाना पुलिस ने मादक पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दो…

18 hours ago

लोकतंत्र के सवाल पर सागर में कांग्रेस का प्रदर्शन, पैदल मार्च के बाद राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन

सागर, 8 अक्टूबर 2026। भारतभवः दिल्ली में विपक्षी नेताओं के खिलाफ हुई कथित पुलिस कार्रवाई…

18 hours ago

नहीं रहे बॉलीवुड के क्रांतिवीर ” नाना पाटेकर “

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर का 8 अक्टूबर को निधन हो गया। वह 75…

24 hours ago