संस्कृति

सबके लिए एक—जैसा कानून क्यों नहीं ?

भाजपा कई वर्षों से लगातार वादा कर रही है कि वह सारे देश में सबके लिए निजी कानून एक-जैसा बनाएगी। वह समान नागरिक संहिता लागू करने की बात अपने चुनावी घोषणा-पत्रों में बराबर करती रही है। निजी मामलों में समान कानून का अर्थ यही है कि शादी, तलाक, उत्तराधिकार, दहेज आदि के कानून सभी मजहबों, जातियों और क्षेत्रों में एक-जैसे हों। भारत की दिक्कत यह है कि हमारे यहां अलग-अलग मज़हबों में निजी-कानून अलग-अलग तो हैं ही, जातियों और क्षेत्रों में अलग-अलग से भी ज्यादा परस्पर विरोधी परंपराएं बनी हुई हैं। जैसे हिंदू कोड बिल के अनुसार हिंदुओं में एक पत्नी विवाह को कानूनी माना जाता है लेकिन शरीयत के मुताबिक एक से ज्यादा बीवियाँ रखने की छूट है। भारत के कुछ उत्तरी हिस्से में एक औरत के कई पति हो सकते थे। भारत के दक्षिणी प्रांतों में मामा-भानजी की शादी भी प्रचलित रही है। आदिवासी क्षेत्रों में बहु पत्नी प्रथा अभी भी प्रचलित है। इसी तरह से पति-पत्नी के तलाक संबंधी परंपराएं भी अलग-अलग हैं।

कृपया यह भी पढ़ें – 

यही बात पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार पर भी लागू होती है। इन सवालों पर संविधान सभा में काफी बहस हुई और नीति निदेशक सिद्धांतों में समान सिविल कोड की बात कही गई लेकिन आज तक किसी केंद्र या प्रादेशिक सरकार की हिम्मत नहीं पड़ी कि सबके लिए एक-जैसा निजी कानून बना दे। अब खुशी की बात है कि उ.प्र., गुजरात, असम और उत्तराखंड की सरकारों के साथ-साथ म.प्र. की सरकार भी समान आचार संहिता लागू करनी की तैयारी कर रही है। वैसे भारत में जन्मे धर्मों- हिंदू, जैन, सिख, बौद्ध आदि मतावंलबियों पर तो यह पहले से लागू है लेकिन ईसाई, मुसलमान, यहूदी आदि विदेशों में जन्मे धर्म के लोग अपने मजहबी कानूनों को ही लागू करने पर अड़े हुए हैं। इसे वे भाजपा की हिंदूकरण की रणनीति ही मानते हैं। ऐसे लोगों से मुझे यही पूछना है कि आप अपने धर्म का पालन करना चाहते हैं या विदेशियों की नकल करना चाहते हैं? क्या इस्लाम, ईसाइयत, यहूदी और पारसी धर्म का पालन तभी होगा, जब हमारे मुसलमान अरबों की, हमारे ईसाई यूरोपियों की, हमारे यहूदी इस्राइलियों की और हमारे पारसी ईरानियों की नकल करें? जब हमारे हिंदुओं ने राजा दशरथ की तीन पत्नियों और द्रौपदी के पांच पतियों को परंपरा को त्याग दिया तो हमारे मुसलमानों को भी डेढ़ हजार साल पुरानी अरबों की पोंगापंथी परंपराओं के अंधानुकरण की क्या जरुरत है?

आलेख  – श्री वेद प्रताप वैदिक जी, वरिष्ठ पत्रकार ,नई दिल्ली।

साभार राष्ट्रीय दैनिक  नया इंडिया  समाचार पत्र  ।

लोकतांत्रिक, निष्पक्ष राजनैतिक,सामाजिक समाचारों के लिये कृप्या हमारे चैनल की लिंक पर क्लिक करें, हमारे चैनल को सबस्क्राईब करें और हमारे लघु प्रयास को अपना विराट सहयोग प्रदान करें , धन्यवाद।

https://www.youtube.com/c/BharatbhvhTV

 

Share this...
bharatbhvh

Recent Posts

E-20 पेट्रोल पर फिर घमासान: राहुल गांधी ने बताया ‘420’

 कर्नाटक की जांच में 31.2% तक इथेनॉल मिलने का दावा राहुल का आरोप—जनता की गाड़ी…

7 hours ago

श्रीरामराजा सरकार का मंदिर आस्था और श्रद्धा का प्रमुख केंद्र – मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव

श्रीरामराजा सरकार के दर्शन कर प्रदेश की सुख-समृद्धि एवं जनकल्याण की कामना की श्रीरामराजा लोक…

1 day ago

CBSE Board Exam 2027: 16 फरवरी से शुरू होंगी 10वीं और 12वीं की परीक्षाएं

10वीं की परीक्षा 9 मार्च तक, जबकि 12वीं के विद्यार्थियों को 9 अप्रैल तक देना…

1 day ago

दीपावली पर बन रहा दुर्लभ बुधादित्य योग, गज पर सवार होकर आएंगी मां लक्ष्मी

ज्योतिषीय गणना के अनुसार इस बार दीपावली पर विशेष संयोग, सुख-समृद्धि और व्यापारिक उन्नति की…

2 days ago

हिरासत में लेते ही शुरू होगी 24 घंटे की उलटी गिनती, सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला

 जांच एजेंसियों की मनमानी पर लगेगी लगाम नई दिल्ली। किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने…

2 days ago

यूजीसी के नियमों पर सरकार का यू-टर्न! विरोध के आगे झुकी केंद्र सरकार

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र ने दिए पुनर्विचार के संकेत, कमेटी बनाने पर भी विचार। सामान्य…

3 days ago