राजनीतिनामा

मध्यप्रदेश राजनीतिनामा – मंत्रिमंडल विस्तार का आधार बनेगा रिपोर्ट कार्ड

बिहार चुनाव हो जाने के बाद एक बार फिर मध्य प्रदेश में मंत्रिमंडल विस्तार की सुगबुगाहट तेज हो गई है सत्ता और संगठन के साथ-साथ अन्य माध्यमों से भी जानकारी जुटाई जा रही है एक-एक बिंदु पर मंत्रियों का परफॉर्मेंस परखा जा रहा है इन बिंदुओं के आधार पर मुख्यमंत्री वन टू वन चर्चा करेंगे ओर फिर जो रिपोर्ट तैयार होगी उस रिपोर्ट के आधार पर मंत्रिमंडल का विस्तार होगा।दरअसल पिछले कुछ महीनों से मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर भोपाल और दिल्ली में चर्चा हो चुकी है और पिछले महीनेलगभग यह तय हुआ कि बिहार चुनाव के बाद मंत्रिमंडल विस्तार किया जाएगा मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव मंत्रिमंडल विस्तार से पहले मंत्रियों का रिपोर्ट कार्ड तैयार करवा रहे मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव सरकार 13 दिसंबर को 2 साल करने किसी जाएंगे जा रही हैं इन दो वर्षों में सरकार ने जो एजेंडा तय और जो योजनाएं बनाई उनके क्रियान्वयन में मंत्रियों का कार्ड क्या कहता है इसी के आधार पर आगे के निर्णय माना जा रहा है कि मुख्यमंत्री सभी विभागों से रिपोर्ट रहे हैं सबसे बड़ा बिंदु यह भी है कि मंत्रीयों ने अपने प्रभार जिलों में कितने दौरे किए कितनी बार रात्रि विश्राम किया गांव में मंत्री ने रात गुजारी या नहीं इसके अलावा संगठन जो रिपोर्ट तैयार कर रहा है उसमें पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ कैसा व्यवहार रहा प्रदेश कार्यालय जिला कार्यालय मंत्री कब कब गए इसके अलावा विभाग में नवाचार किया उसके क्या परिणाम रहे।

संगठन के अलावा भी रिपोर्ट तैयार हो रही है इसकी भनक लगते ही अधिकांश मंत्री सतर्क और सावधान हो गए सरकार हैं की रिपोर्ट इस बात पर फोकस कर रही है की योजनाओं पूरे क्रियान्वयन कितने प्रभावित ढंग से किया और संगठन की रिपोर्ट किया इस बात पर केंद्रित है के मंत्रियों की कार्यशैली से राजनीतिक रिपोर्ट रूप से पार्टी को कितना लाभ हुआ पार्टी जिस तरह से चौकाने लिए वाली निर्णय लेने के लिए जानी जाती है उस कारण भी लगभग बुला एक दर्जन मंत्री संशय की स्थिति में है क्योंकि पिछले महीने वाले गुजरात में मुख्यमंत्री भूपेन पटेल को छोड़कर सभी मंत्रियों और इस्तीफा ले लिए गए थे यही प्रयोग पार्टी हाईकमान यदि मध्य पार्टी प्रदेश में भी दोहराती है तो फिर एक दर्जन से ज्यादा मंत्री बाहर नेताओं हो सकते हैं वर्तमान में मंत्रिमंडल में मंत्रियों की संख्या 30 है या चार मंत्री पद खाली है और यदि एक दर्जन मंत्रियों को बाहर कोई किया जाता है तो फिर लगभग 16 मंत्री नए बनाए जा सकते हैं सत्ता पिछले दो वर्षों में केवल एक बार मंत्रिमंडल का विस्तार लोकसभा चुनाव के दौरान कांग्रेस से भाजपा में आए रामनिवास रावत को कैबिनेट मंत्री बनाकर किया गया था लेकिन भी का विधानसभा का उपचुनाव हार गए और फिर मंत्रिमंडल से बाहर हो गए इसके बाद कयास जरूर लगाए जाते रहे लेकिन अव तक हो नहीं पाया लेकिन अब जिस तरह से गुजरात में बड़ा फेरबदल हुआ इस तरह मध्य प्रदेश में बड़े फेरबदल की तैयारी चल रही है। कुल मिलाकर बिहार चुनाव के एग्जिट पोल के जिस तरह से अनुमान सामने आ रहे हैं उससे भाजपा गठबंधन के की सरकार बनने की पूरी संभावनाएं हैं जाहिर है भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व अब उन प्रदेशों पर फोकस करेगा जहां उस अभी से 2027 और 2028 के विधानसभा चुनाव की तैयारी करना है क्योंकि इसी के बाद फिर 2029 के लोकसभा चुनाव होना है इस कारण पार्टी कहीं भी किसी भी प्रकार की ढिलाई नहीं बरतना चाहती है और ऐसा निर्णय चाहती है जिसमें सरकार और संगठन को पार्टी को और मजबूत करने में सुविधा हो सके।

श्री देवदत्त दुबे ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश  

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