नई दिल्ली:
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई जीएसटी काउंसिल की 53वीं बैठक में छोटे और मध्यम व्यापारियों को एक बहुत बड़ी राहत दी गई है। काउंसिल ने टैक्स चोरी और गड़बड़ी के मामलों में कड़े नियमों को उदार बनाते हुए कर अधिकारियों की सीधी गिरफ्तारी की शक्तियों पर रोक लगा दी है।इस बैठक में लिए गए मुख्य फैसले और उनके प्रभाव इस प्रकार हैं:
- गिरफ्तारी और आपराधिक मुकदमे की सीमा बढ़ी: अब जीएसटी मामलों में आपराधिक मुकदमा चलाने की न्यूनतम सीमा को 1 करोड़ रुपये से बढ़ाकर सीधे 5 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसका सीधा मतलब यह है कि यदि गड़बड़ी 5 करोड़ रुपये से कम की है, तो व्यापारियों को सीधे जेल नहीं भेजा जा सकेगा। वे केवल तय जुर्माना (पेनल्टी) भरकर मामले को सुलझा सकते हैं।
- नोटिस से मुक्ति: छोटे व्यापारियों को राहत देते हुए काउंसिल ने तय किया है कि 10,000 रुपये से कम की टैक्स चोरी या विसंगति पर कारोबारियों को कोई विभागीय नोटिस जारी नहीं किया जाएगा।
- अदालतों के विवेक पर फैसला: अधिकारियों की मनमानी को रोकने के लिए कानून के तहत तय न्यूनतम सजा के प्रावधान को हटा दिया गया है। अब किसी भी मामले में जुर्माना, जेल या दोनों का फैसला पूरी तरह से अदालतों के विवेक (Discretion) पर निर्भर करेगा।
- ई-कॉमर्स विक्रेताओं के लिए आसानी: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए सामान बेचने वाले छोटे दुकानदारों के लिए भी नियमों को पहले से काफी सरल और सुगम बनाया गया है।
- ईमानदार खरीदारों की सुरक्षा: इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) का दावा करने वाले ईमानदार व्यापारियों के हितों की रक्षा के लिए अधिकारियों की एक विशेष कमेटी गठित की जाएगी। यह कमेटी तीन महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी, जिसे अगली बैठक में विचार के लिए रखा जाएगा।
टैक्स स्लैब में कोई बदलाव नहीं:
साफ कर दें कि इस बैठक में नियमों और प्रक्रियाओं को तो आसान बनाया गया है, लेकिन मौजूदा टैक्स स्लैब या रेट स्ट्रक्चर में कोई बदलाव नहीं किया गया है। काउंसिल के इन कदमों से व्यापार करना (Ease of Doing Business) बेहद आसान होगा और कर अधिकारियों की अनावश्यक दखलअंदाजी बंद होगी।