डॉ शंकर दयाल शर्मा नेहरू से मधुर संबंधों के कारण भोपाल के लिए बहुत कुछ लाए। जब 40 लाख की आबादी वाले विंध्य प्रदेश को तीन करोड़ की सालाना वित्तीय सहायता मिलती थी तब 8 लाख आबादी वाले भोपाल राज्य को दस करोड़ तक की मदद मिलने लगी। डॉ शंकर दयाल शर्मा ने प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरु को इस कदर प्रभावित कर रखा था कि प्रधानमंत्री के रूप में वे साल में दो बार भोपाल अवश्य आते थे। सन 1956 के पहले तक नेहरू 18 बार प्रधानमंत्री के रूप में भोपाल आ चुके थे वे जब भी आते तो चिकलोद की बेगम की कोठी पर रुकते थे पर एक बार राज्यपाल हरिविनायक पाटकर ने उन्हें रोक दिया और कहा कि प्रधानमंत्री को राजभवन में ही रुकना चाहिए।
नेहरू की यात्राओं का शर्मा को पूरा पूरा फायदा उठाया बुधनी में ट्रैक्टर टेस्टिंग संस्थान भोपाल में पॉलिटेक्निक इंजीनियरिंग कॉलेज तभी की देन है मायाराम सुरजन ने अपनी आत्मकथा पुस्तक में लिखा है शर्मा को अधिकारियों की ऐसी कुशल टीम मिली थी जिसके लिए किसी भी कच्चे रास्ते के दोनों तरफ रातों-रात बड़े-बड़े वृक्ष ऊगा देना सरल बात थी । पंडित नेहरू जब कम्युनिटी डेवलपमेंट कार्यक्रम के लिए खजूरी ग्राम आए तो वृक्षों की यह पंक्ति देखकर दंग रह गए। दरअसल यह डॉ शर्मा का कल्पनाजन्य ऐंसा बगीचा था जो ऐसे मौकों पर ही कभी कहीं भी पहुंचाया जा सकता था। एक बार नेहरु मध्य प्रदेश की यात्रा पर सागर विश्वविद्यालय में पुस्तकालय भवन का शिलान्यास करने आए थे इस दौरान जब उन्होंने सागर से गुजरने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 26 जो अब नार्थ साऊथ कॉरिडोर कहलाता है के बारे में एक तहसीलदार से पूछा कि
यह रोड क्या हाईवे है ?
तहसीलदार तहसीलदार थोड़ा कम अंग्रेजी समझते थे उन्होंने जवाब दिया
“नहीं सर बहुत ऊंचा है” तहसीलदार साहब ऊंचाई वाली समझते थे।
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