धर्म-ग्रंथ

रुद्राक्ष धाम स्थित श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर में हजारों भक्तों ने दर्शन किए

रुद्राक्ष धाम स्थित श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर में हजारों भक्तों ने दर्शन किए

सागर। शहर के प्रसिद्ध धर्मस्थल रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण में स्थित श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर में अंजनी पुत्र वीर हनुमान जी के प्रकटोत्सव का पुण्य पर्व धार्मिक पूजन संस्कारों के साथ उत्साह पूर्वक मनाया गया। चरण सेवक पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह ने परिजनों के साथ प्रातः काल पहुंच कर अभिषेक, 56 भोग और आरती के साथ कार्यक्रमों का आरंभ किया। रात्रि 11 बजे तक चले दर्शनार्थियों के क्रम में हजारों श्रद्धालुओं ने श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी के दर्शन किए। रुद्राक्ष धाम मंदिर प्रांगण स्थित श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी का दिव्य और भव्य मंदिर में प्रात: से ही अखंड रामायण का सस्वर पाठ आरंभ हुआ। प्रातः कालीन अनुष्ठानों के साथ दर्शन आरंभ हुए। श्री हनुमान लला जू को 56 भोग के बाद प्रसादी वितरण भी हुआ। संध्या काल में श्री राधे राधे में मंडल द्वारा भजन संध्या की प्रस्तुति की गई। संध्या आरती में सैकड़ों श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर मंदिर परिसर को ध्वजाओं व आकर्षक रंगीन एलईडी सजावट से सजाया गया था और संगीत के साथ पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण बना रहा। पूर्व गृहमंत्री, खुरई विधायक भूपेंद्र सिंह स्वयं दिन भर भगवान हनुमान जी की सेवा में प्रांगण में उपस्थित रहे। शहर के अनेक गणमान्य व जनप्रतिनिधिगण सहित हजारों श्रद्धालुओं ने श्री दक्षिणमुखी हनुमान जी मंदिर में दर्शन कर पुण्य लाभ अर्जित किया।

संकल्प शक्ति से असंभव को संभव बनाते हैं हनुमान जी – अविराज सिंह

युवा नेता अविराज सिंह ने कहा कि भगवान हनुमान शक्ति, बुद्धि, विनम्रता और निष्काम सेवा के अद्वितीय संगम हैं, जिनका चरित्र हर युग में मानवता को दिशा देने वाला रहा है। उन्होंने कहा कि महाकाली की अपार शक्ति और महासरस्वती के दिव्य ज्ञान का अद्भुत समन्वय हनुमान जी में देखने को मिलता है। उनका अहंकार पूर्णतः शून्य है, इसलिए उनकी शक्ति अनंत और कल्याणकारी है। वे साक्षात शिव का वह स्वरूप हैं, जो अहंकार का दमन कर सेवा, समर्पण और भक्ति का संदेश देते हैं। हनुमान जी कलयुग के जाग्रत देवता हैं और सच्चे मन से उनका स्मरण करने पर वे भक्तों के सभी संकटों का निवारण करते हैं तथा आत्मबल को जागृत करते हैं। अविराज सिंह ने कहा कि हनुमान जी ने अपनी अपार शक्ति और सामर्थ्य का उपयोग कभी व्यक्तिगत सुख या स्वार्थ के लिए नहीं किया, बल्कि सदैव परमार्थ और लोक-कल्याण के लिए समर्पित रखा। उन्होंने यह सिद्ध किया कि जब ‘प्रतिभा’ और ‘शक्ति’ का उपयोग दूसरों की भलाई के लिए होता है, तो साधारण व्यक्ति भी असाधारण बनकर देवतुल्य स्थान प्राप्त कर सकता है। हनुमान जी आत्म-कल्याण और लोक-कल्याण के सर्वोच्च आदर्श हैं। वे सर्वज्ञ हैं और प्रेमपूर्वक स्मरण करने मात्र से ही अपने भक्तों के कष्टों को दूर कर देते हैं, यही कारण है कि उन्हें जन-जन का आराध्य माना जाता है।

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