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सांसद डॉ. लता गुड्डू वानखेड़े ने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री से की मुलाकात

हर घर नल से जल मिशन के साथ सागर में आर.ओ. आधारित शुद्धिकरण संयंत्र का प्रस्ताव

सागर जिले के नागरिकों के लिए स्वच्छ पेयजल अब सिर्फ सपना नहीं रहेगा, बल्कि हकीकत बनने की ओर कदम बढ़ा रहा है, हर घर नल से जल–जल जीवन मिशन की दिशा में सागर सांसद डॉ. लता गुड्डू वानखेड़े ने एक नया संकल्प लिया है। उन्होंने केंद्रीय जल शक्ति मंत्री श्री सी.आर.पाटिल जी से मुलाकात कर जिले में 50 ग्राम पंचायतों और नगरपालिकाओं में आरओ आधारित सामुदायिक जल शुद्धिकरण संयंत्र स्थापित करने की पायलट परियोजना की स्वीकृति का निवेदन किया है सागर जिले की विशिष्ट जल गुणवत्ता चुनौतियों ने वर्षों से यहां के ग्रामीण और शहरी परिवारों को संकट में डाल रखा है। भूजल में फ्लोराइड, आयरन और उच्च टीडीएस की उपस्थिति ने न केवल स्वास्थ्य पर बुरा असर डाला है, बल्कि माताओं और बहनों को रोजाना कई किलोमीटर दूषित जल लाने के लिए मजबूर भी किया है। ऐसे में यह प्रस्तावित परियोजना सागर के लिए आशा की नई किरण है।

सौर ऊर्जा से संचालित संयंत्र, लाखों नागरिक होंगे लाभान्वित

सांसद डॉ. वानखेड़े ने मंत्री जी को अवगत कराया कि प्रस्तावित पायलट परियोजना के तहत चयनित 50 ग्राम पंचायतों और नगरपालिकाओं में सौर ऊर्जा संचालित आरओ जल शुद्धिकरण संयंत्र स्थापित किए जाएंगे। प्रत्येक संयंत्र से 2000 से 3000 परिवारों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराया जाएगा, जिससे लगभग साढ़े तीन लाख से अधिक नागरिक सीधे लाभान्वित होंगे। इस योजना की खास बात यह है कि इसमें विशेष प्रावधान भी शामिल किए गए हैं— स्कूलों, आंगनबाड़ी केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में छोटे आरओ सिस्टम की स्थापना, स्थानीय स्व-सहायता समूहों और युवाओं को संयंत्र संचालन का प्रशिक्षण, ग्राम सभाओं के साथ सहयोग कर सामुदायिक स्वामित्व की भावना से संयंत्र संचालन, पर्यावरण अनुकूल और लागत प्रभावी सौर ऊर्जा आधारित संयंत्र, परियोजना की समय सीमा 3 से 18 माह के भीतर रखी गई है। प्रत्येक संयंत्र पर लगभग 13 से 15 लाख रुपये की लागत आएगी, इसमें रखरखाव और प्रशिक्षण का प्रावधान भी शामिल है। दीर्घकालिक संचालन हेतु जल समितियों के गठन का भी प्रस्ताव है।

स्वास्थ्य सुधारमहिला सशक्तिकरण और रोजगार सृजन की ओर कदम – इस परियोजना के दूरगामी लाभ केवल स्वच्छ जल तक सीमित नहीं रहेंगे। डॉ. वानखेड़े ने बताया कि संयंत्रों की स्थापना से अपेक्षित परिणामों मे जैसे फ्लोरोसिस और डायरिया जैसी जल जनित बीमारियों में 50 से 60 प्रतिशत तक कमी, महिलाओं को जल के लिए लंबी दूरी तय करने की पीड़ा से मुक्ति और सामाजिक सशक्तिकरण, स्थानीय स्तर पर युवाओं के लिए रोजगार सृजन, स्वास्थ्य व्यय में कमी कर आर्थिक बचत को बढ़ावा शामिल हैं।

सांसद डॉ. लता गुड्डू वानखेड़े ने मंत्री जी से निवेदन करते हुए कहा कि यह पायलट प्रोजेक्ट सागर जिले को मध्य भारत का पहला सुरक्षित जल मॉडल जिला बना सकती है। यह न केवल लाखों परिवारों को स्वच्छ जल का वरदान सिद्ध होगी, बल्कि हर मां के चेहरे पर मुस्कान और हर बच्चे के भविष्य में नई आशा भी लाएगी इसलिए उन्होंने निवेदन किया कि अमृत काल में विकसित भारत 2047 के सपने को साकार करने के लिए यह कदम एक वैश्विक मॉडल बन सकता है। जल जीवन मिशन को नई ऊंचाइयों तक ले जाने और भारत को स्वच्छ जल के क्षेत्र में अग्रणी बनाने के लिए इस परियोजना की तत्काल स्वीकृति एवं वित्तीय सहायता और दिशा निर्देश प्रदान करने अनुरोध किया।

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