राजनीतिनामा

मध्यप्रदेश राजनीतिनामा – भाजपा राज में कौन बनेगा प्रदेश अध्यक्ष!

प्रदेश की सियासत में सबसे बड़ा यक्ष प्रश्न अब यही है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष कौन बनेगा। हालांकि अभी प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए कार्यक्रम तय नहीं हुआ है लेकिन जिला अध्यक्षों के चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष के चुनाव के लिए कोरम पूरा हो गया है इसलिए अब सभी की जिज्ञासा अगले प्रदेश अध्यक्ष को लेकर है। दरअसल प्रदेश में और देश में भाजपा की सरकार होने के कारण भाजपा का प्रदेश अध्यक्ष बनना महत्वपूर्ण हो जाता है। पार्टी का राष्ट्रीय नेतृत्व हमेशा से ही चौंकाने वाले फैसले लेते आ रहा है। इस कारण सीधे तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता लेकिन क्षेत्रीय जातीय समीकरणों को देखते हुए अलग-अलग नाम सामने आ रहे हैं। अब तक के संगठन के चुनाव में जिस तरह से कार्यकर्ताओं की राजशुमारी करने के बाद नेताओं में सहमति बनाकर किस्तों में जिला अध्यक्ष घोषित किए गए। इस तरह भाजपा और संघ के चुनिंदा पदाधिकारी की सहमति के आधार पर नया प्रदेश अध्यक्ष चुना जाना माना जा रहा है। बहरहाल भाजपा में अधिकांश अवसरों पर कोई सांसद ही प्रदेश अध्यक्ष बना है ऐसे में किसी सांसद के ही प्रदेश अध्यक्ष बनने के कयास लगाए जा रहे हैं।

अब सांसदों में किस क्षेत्र से और किस जाति वर्ग से लिया जाना है इसको लेकर पार्टी और संघ पदाधिकारीयों के बीच मंथन चल रहा है। समान सामान्य अनुसूचित जाति अनुसूचित जनजाति वर्ग से प्रतिशत अध्यक्ष बनाए जाने की संभावनाएं ज्यादा है क्योंकि पिछड़े वर्ग से मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव है जाति के अलावा प्रदेश में जिस तरह से महिलाओं को पार्टी से जोड़ने का अभियान निरंतर चल रहा है। खासकर लाडली बहना योजना को भाजपा की जीत का सबसे बड़ा आधार बताया जा रहा है। उस पार्टी के रणनीतिकार इस बार महिला प्रदेश अध्यक्ष को बनाने की पैरवी भी कर रहे हैं। लगभग आधा दर्जन महिलाओं के नाम चर्चाओं में भी हैं। इनमें सर्वाधिक सक्रिय प्रदेशव्यापी पहचान रखने वाली महिला की तलाश की जा रही है। जिन महिलाओं के नाम चल रहे हैं उनमें प्रदेश महामंत्री और राज्यसभा सांसद कविता पाटीदार, भाजपा महिला मोर्चा की पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष सांसद लता वानखेड़े, मंत्री संपत्तियां ऊइके, सांसद हिमाद्री सिंह, सांसद रीती पाठक, पूर्व मंत्री अर्चना चिटनिस के नाम प्रमुखता से लिए जा रहे हैं। कुल मिलाकर भाजपा के अगले प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं चल रही हैं। पुरुष वर्ग से यदि अध्यक्ष बनता है तो फिर एक दर्जन से भी ज्यादा नाम विभिन्न जाति समूह से आते हैं लेकिन महिला वर्ग से बहुत ज्यादा नाम नहीं है। राष्ट्रीय नेताओं के प्रदेश प्रवास के बाद जो बैठक होगी। उसके बाद संभावना बनेगी लेकिन माना जा रहा है कि पार्टी 31 जनवरी तक प्रदेश अध्यक्ष का नाम तय कर लेगी।

व्यक्तिगत विचार-आलेख-

श्री देवदत्त दुबे जी ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक समीक्षक, मध्यप्रदेश  

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