राजनीतिनामा

भाजपा और कांग्रेस का अप्रासंगिक होना असंभव

भारत की राजनीति में अब सब कुछ हो सकता है लेकिन भाजपा और कांग्रेस कभी भी अप्रासंगिक नहीं हो सकती। भले ही भाजपा ने स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा न लिया हो और कांग्रेस ने लिया हो। हिमाचल और गुजरात के नतीजे बताते हैं कि इन दोनों दलों को निर्मूल करने की कोशिश फिलहाल कामयाब नही हो सकती। कांग्रेस ने सवा दो सदियों के बीच अपनी उपस्थिति से जो हासिल किया है उसे भाजपा ने कुल 42 साल में न केवल हासिल कर लिया बल्कि सत्ता में भी अंगद के पैर की तरह मजबूत बना लिया है।बिखरा हुआ विपक्ष बीच -बीच में अपनी ताकत जुटा कर भाजपा की जड़ों को हिलाता जरूर है किन्तु समूल उखाड़ नहीं पा रहा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नसीब में शायद लिखा है कि वे देश के लिए बिना जेल जाए भी अपनी आंखों की किरकिरी प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की तरह कम से कम तीसरे कार्यकाल की जमीन तो बना ही लेंगे। और प्रतिदिन गालियां खाकर भी सत्ताच्युत नहीं होंगे। मोदी को अब मतदाता नहीं स्वयं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या भाजपा ही हटा सकती है। मेरे अधिकांश मित्र और पाठक जानते हैं कि मैं प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की नीतियों का प्रबल आलोचक हूं।उनका व्यक्तित्व/कृतित्व भी मुझे नहीं लुभाता, फिर भी अब मेरी धारणा बन गई है कि मोदी जी का भाग्य प्रबल है और वे बिना कुछ करे भी सत्ता में रह सकते हैं।

कृपया यह भी पढ़ें – 

कांग्रेस अध्यक्ष श्री मल्लिकार्जुन खड़गे भले ही मोदी जी को बिभीषण का अग्रज कहते और मानते हों किन्तु देश की जनता शायद ऐसा नहीं मानती। जनता ने मोदीजी को अवतार पुरुष तो मान ही लिया है। राजनीति में मैंने देश, दुनिया के अनेक प्रधानमंत्रियों और राष्ट्रपतियों को दूर -पास से देखा सुना है, लेकिन मोदी जी जैसा कोई दूसरा नहीं देखा जो भेषज की जगह गालियों के बूते भी भला -चंगा है। मोदी जी निश्चित ही भाजपा के गोबर्धन गिरधारी हैं जो सब कुछ उलटा -पुलटा होने के बावजूद भाजपा को ध्वस्त होने से बचाएं हुए हैं। उन्हें न रथारूढ़ होना पड़ रहा है और न हजारों किमी की पदयात्रा करना पड़ रही है। हमारे जैसे अर्बन नक्सलियों की बिरादरी भी मोदी जी का लोहा काटने में नाकाम रहे हैं। तानाशाही के खिलाफ लड़ाई का तजुर्बा मुल्क को है।1974 में आपातकाल के विरोध में मात्र 19 महीने की त्रासदी ने तत्कालीन विपक्ष को एकजुट कर दिया था, किंतु इस बार आठ साल बाद भी विपक्षी दल एकजुट नहीं हो पा रहे। लगता है कि अभी अवाम के सब्र का बांध टूटा नहीं है।अभी सहनशीलता बाकी है। हिमाचल और गुजरात विधानसभा चुनावों के अनुमान बता रहे हैं कि सियासत में अभी ये नूरा कुश्ती लगातार चलने वाली है।अभी किसी दल की आंधी -सांधी नहीं चल रही।सभी राजनीतिक दल अपने -अपने तरीके से देश को देखना तथा चलाना चाहते हैं। सबके लिए देश ‘अंधो का हाथी था, है और आगे भी रहेगा। हिमाचल और गुजरात की जनता का अभिनंदन। उसने अपने ढंग से राजनीति को आकार देने की कोशिश जरूर की है।

 

व्यक्तिगत विचार-आलेख-

श्री राकेश अचल जी ,वरिष्ठ पत्रकार , मध्यप्रदेश  । 

लोकतांत्रिक, निष्पक्ष राजनैतिक,सामाजिक समाचारों के लिये कृप्या हमारे चैनल की लिंक पर क्लिक करें, हमारे चैनल को सबस्क्राईब करें और हमारे लघु प्रयास को अपना विराट सहयोग प्रदान करें , धन्यवाद।

https://www.youtube.com/c/BharatbhvhTV

 

 

Share this...
bharatbhvh

Recent Posts

लोगों की हत्याएं की गई हैं – करने वाला कोई और नहीं सरकार है – जीतू पटवारी

सरकार मे थोड़ी सी शर्म है तो आबकारी मंत्री का इस्तीफा दिलवाएं - पटवारी सागर…

5 hours ago

सागर में जहरीली शराब का कहर: मौत का आंकड़ा 22 पहुंचा, 112 बीमार

बंडा क्षेत्र में संदिग्ध अमानक/अवैध शराब के सेवन से मचा हड़कंप, पिता-पुत्र समेत 22 लोगों…

6 hours ago

सागर में जहरीली शराब का कहर: 11 मौतों से मचा हड़कंप, 35 से ज्यादा लोग अस्पताल में

आबकारी विभाग और पुलिस पर गिरी गाज, कई अधिकारी निलंबित | ललितपुर से शराब सप्लाई…

1 day ago

श्रीकृष्ण, करूक्षेत्र और प्रबंधन

महाभारत और श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भों से यह अकाट्य रूप से सिद्ध होता है कि श्रीकृष्ण…

3 days ago

मध्यप्रदेश – कार्य समिति के निर्णायो के क्रियान्वयन पर फोकस

राम राजा सरकार की नगरी ओरछा में दो दिवसीय चली बीजेपी कार्य समिति की बैठक…

3 days ago

राम मंदिर प्रबंधन में बड़ा बदलाव, पहली बार नियुक्त हुआ CEO

अयोध्या। भारतभवः  श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की रकम से जुड़ी चोरी की घटना के…

5 days ago