वैसे तो भारतीय संस्कृति में साल भर त्योहार मनाए जाते हैं लेकिन होली का कुछ अलग ही महत्व है यह त्यौहार अन्याय पर न्याय नकारात्मकता पर सकारात्मकता , नास्तिकता पर आस्तिकता की जीत है और सबसे बड़ा संदेश होली का यही है कि हम एक दूसरे के हो लें यह एक ऐसा त्यौहार है जो हमें याद दिलाता है कि हम सब पुराने गिले- शिकवे मिटाकर एक दूसरे से गले मिले जीवन में एक नई शुरुआत करें जीवन को विभिन्न रंगों से भरे ताकि परिवार समाज और देश में एकता और शांति स्थापित हो सके विभिन्न रंग होली पर यही संदेश देते हैं की भेदभाव ऊंच- नीच और जात पात की दीवारों को गिराते हुए सब एक रंग में रंग जाए मानव का स्वभाव उत्सव धर्मिता का है हमारे देश में 365 दिन 700 से भी ज्यादा त्योहार आते हैं। जिसमें हम उत्सवी जीवन जी सकते हैं लेकिन इसके बावजूद भी राग द्वेष लोभ घृणा ईर्ष्या झूठ में पड़कर तनाव और उदासी में चले जाते हैं।
यदि हम सत्य प्रेम करुणा के मार्ग पर चलें उत्सव धर्मिता हमारे स्वभाव के अनुसार हमारे जीवन में भी आएगी फिर हार और जीत हानि या लाभ भेद नहीं रहता बहरहाल होली एक ऐसा संपूर्ण त्यौहार है जिसमें सब कुछ है इसमें अशुभ अन्याय नास्तिकता का दहन है और प्यार की पिचकारी में रंगों की बहार है और जिन्हें होली पर थोड़ा खुलकर मनोरंजन करने का भाव है उनके लिए बुरा ना मानो होली है कि जबरदस्ती भी है जिसके माध्यम से उन दबी कुचली भावनाओं को बाहर निकालने का मौका रहता है जो सामान्य परिस्थिति में कहने में संकोच करते हैं कुल मिलाकर कल जो होलिका दहन हुआ है वह समस्त बुराइयों और नकारात्मकता का हुआ है और आज से हम सकारात्मकता और अच्छाइयों की तरफ आगे बढ़ेंगे जिस तरह सर्दी से गर्मी की मौसम की तरह बढ़ना शुरू हुआ है।
व्यक्तिगत विचार आलेख
श्री देवदत्त दुबे जी ,वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनैतिक विश्लेषक मध्यप्रदेश ।
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