राजनीतिनामा

CJP का 5 सितंबर को फिर आंदोलन का ऐलान, सरकार से वादे पूरे करने की मांग

नई दिल्ली। भारतभवः 

जंतर-मंतर से शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी यानी CJP का आंदोलन एक बार फिर राजधानी की सड़कों पर लौटने की तैयारी में है। पार्टी ने ऐलान किया है कि आगामी 5 सितंबर को इंडिया गेट से नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक मार्च निकाला जाएगा। CJP का कहना है कि पिछले आंदोलन के दौरान सरकार की ओर से किए गए आश्वासनों पर भरोसा कर प्रदर्शन समाप्त किया गया था, लेकिन अब तक कई प्रमुख मांगों पर कार्रवाई नहीं हुई है।

CJP के मुताबिक, 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्च के बाद सरकार के साथ बातचीत और समझौते के आधार पर आंदोलन वापस लिया गया था। पार्टी का आरोप है कि छात्रों और प्रदर्शनकारियों से जुड़े मामलों में दिए गए आश्वासन अब तक जमीन पर दिखाई नहीं दे रहे हैं। CJP ने इस बार आंदोलन में उन छात्रों के परिवारों को भी शामिल करने की बात कही है, जिनकी मौत को पार्टी NEET-UG परीक्षा विवाद से जोड़कर देखती है। पार्टी की प्रमुख मांगों में छात्रों से जुड़े मामलों में दर्ज एफआईआर वापस लेना, शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई रोकना और कथित तौर पर दिए गए अन्य आश्वासनों को लागू करना शामिल है।पार्टी नेताओं का कहना है कि आंदोलन समाप्त होने के बाद सरकार को मांगों पर आगे की कार्रवाई करनी चाहिए थी। CJP नेताओं ने चेतावनी दी है कि आंदोलनकारियों के धैर्य को कमजोरी नहीं समझा जाना चाहिए।

5 सितंबर को फिर शक्ति प्रदर्शन

सोमवार को हुई CJP की राष्ट्रीय कार्य समिति की वर्चुअल बैठक में 5 सितंबर के मार्च का फैसला लिया गया। प्रस्तावित मार्च इंडिया गेट से शुरू होकर नई दिल्ली पुलिस मुख्यालय तक जाने की बात कही गई है।

पार्टी ने छात्रों और युवाओं से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। CJP का कहना है कि यह केवल राजनीतिक प्रदर्शन नहीं, बल्कि सरकार से किए गए वादों को पूरा कराने की मांग को लेकर आंदोलन होगा।इसी बीच CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके ने देश के विभिन्न राज्यों के शिक्षा मंत्रियों को पत्र लिखकर सरकारी स्कूलों की स्थिति और शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी मांगी है।CJP नेताओं का कहना है कि शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े सवाल केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं हैं। युवाओं के भविष्य से जुड़े इन मुद्दों पर सरकारों को जवाबदेह होना चाहिए।

                          5 सितंबर के प्रस्तावित मार्च ने एक बार फिर केंद्र सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद की संभावना को महत्वपूर्ण बना दिया है। सरकार यदि आंदोलनकारियों की मांगों पर ठोस बातचीत करती है तो टकराव को टाला जा सकता है, लेकिन यदि CJP के आरोपों के मुताबिक पुराने आश्वासन लंबित रहते हैं, तो राजधानी में आंदोलन एक बार फिर बड़ा मुद्दा बन सकता है अब निगाहें 5 सितंबर के मार्च और उससे पहले सरकार की ओर से उठाए जाने वाले कदमों पर टिकी हैं।

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