व्यंग्य-बाण

समस्याओं का समाधान , और कूटने की परम्परा…

तो गुरु देश में इस समय भारी समस्याओं का दौर चल रहा है एक महीने देर से जागने के बाद देवराज इन्द्र की फिर झपकी लग गयी है और इस बार प्रभु बंद करना भूल गए है सो लगातार बारिश हो रही है , हिमांचल से रोज पहाड़ और बदल फटने के ऐंसे ऐंसे विडिओ सामने आ रहे है कि ख्याल आते ही सोफे से उतारकर जमीन पर बैठ जाते है , असम मिजोरम आपस में ही चीन बने जा रहे है , मोबाइल खोलो तो साला इसराइल दिखाई देता है हलाकि इससे थोड़ी        वीआईपी वाली फीलिंग तो आती है लेकिन गुरु पर्सनल चीजें तो आखिर परसनल ही होतीं है…   है कि नहीं   ?  और इन सबसे इतर किसान अलग नहीं मान रहे तो ये हैं समस्यांए और जहाँ सब समस्याओं का समाधान होना है उस मंदिर (संसद) के अंदर कोई भी पुजारी मन्त्र जाप करने को  तैयार नहीं हो रा.
                          सो देश कि नैया कैसे पार लगेगी भइया …      भेजे का भेजा फ्राई हो रहा है
जब एक पढ़े लिखे नौजवान ने अपनी समस्या का पिटारा  चबूतरे पे हुक्का गुड़गुड़ाते बुजुर्ग से कहा तो बुजुर्ग एकटक नौजवान को देखता रहा फिर लम्बा कश लेते हुए एक और सवाल दाग दिया बोलै-
बेटा एक बात बताओ पहले इतने लोग बीमार होते थे जितने आज हो रहे हैं ?
इस घनघनाते सवाल से पढ़े लिखे युवक का दिमाग हिल गया और वोला अरे ताऊ ये तो बात सही है कभी सोचा ही नहीं ऐंसे तो
तो बुजुर्ग बोलै बेटा बस इसी के जवाब में तुम्हारी सारी परेशानियों का हल है  परेशानियां तो तुम्हे पता ही है हल में बता देता हूँ तो सुनो –
बुजुर्ग ने अपने तजुर्बे से उसको बोला कि बेटा पहले कूटने की परंपरा थी जिससे इम्यूनिटी पावर मजबूत रहती थी। पहले हम हर चीज को कूटते थे !
जबसे हमने कूटना छोड़ा है तब से हम सब बीमार होने लग गए जैसे पहले खेत से अनाज को कूट कर घर लाते थे। घर पर ही धान कूटकर चावल निकलता था !
घर में मिर्च मसाला कूटते थे । कपड़े भी कूटकूट कर धोते थे।
कभी कभी तो बड़ा भाई भी छोटे को कूट देता था और जब छोटा भाई उसकी शिकायत मां से करता था तो मां बड़े भाई को कूट देती थी। अगर गलती से भी किसी का छोटा सा भी नुकसान हो गया तो फिर पिताजी जमकर कूटते थे !
यानी कुल मिलाकर दिन भर कूटने का काम चलता रहता था !
स्कूल में मास्टरजी तो कूटते रहते थे । कभी अगर गिर पड़े और चोट लग गई तो फिर पिता जी कूटते थे!
पुलिस बदमाशों को उल्टा लटकाकर कूट देती थी तो अपराध काम होते थे
जहाँ देखो वहां पर कूटने का काम चलता रहता था तो बीमारी नजदीक नहीं आती थी !
सबकी इमुनिटी पावर मजबूत रहती थी !
जब कभी बच्चा सर्दी में नहाने से मना करता था तो मां पहले कूट कर उसकी इमुनिटी पावर बढ़ाती थी और फिर नहलाती थी
वर्तमान समय में इम्यूनिटी पावर बढ़ाने के लिए कूटने की परंपरा फिर से चालू होनी चाहिए
नौजवान ने बढे ध्यान से बुजुर्ग कि बात सुनी और बोलै ताऊ बात तो तुम्हारी बिलकुल सही है लेकिन इस कूटने कि परम्परा से मेरी समस्याओं का क्या लेना देना
ताऊ बोले क्या बेटा जरा जोर से बोलो चिल्लाकर
अरे ताऊ मने कहा कूटने कि परम्परा से मेरी समस्याओं का क्या लेना देना नौजवान ने चिल्लाकर कहा
बुजुर्ग आदमी ने हंसकर कहा कि इन पढ़े लिखे छोरों से तो चिल्लाना भी न आवे तरीके से देख बेटा ऐंसा है मने सुनाई देवे है बिलकुल कम 5 % समज लो तो तुम एक काम करो ये पुड़िया लो और अच्छे से कूटकर हुक्का के जर्दा में मिला दो और अपनी सेहत का रखो ख्याल जिससे बीमार नहीं होंगे बेटा महामारी फैली है और जान है तो जहां है और जहां है तो समस्यांए ।।
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