क्या तीसरी बार सत्ता में आई भाजपा की नरेंद्र मोदी सरकार कमजोर हो गई है यह सवाल इसलिये उठता है कि सरकार ने महज तीन महीनो में ही कुछ अहम मददों पर अपने पैर वापिस खीचे है जिनमें प्रमुख है लेटरल एंट्री के जरिये केंद्र सरकार में 45 पदों पर सीधी नियुक्ति के विज्ञापन को वापिस लेना हो दूसरा मुददा है वक्फ बोर्ड जैसे अहम कानून में बदलाव को भी सरकार ने बिल पेश करने के बाद इसे संयुक्त संसदीय समिति के पास भेज दिया इसी प्रकार ब्राडकास्ट रेगुलेशन बिल को लाने की पूरी तेयारी के बाद अब सरकार उस पर चुप है इसके पहले भी सरकार पिछले कार्यकाल में भूमि अधिग्रहण और कृषि कानून जैसे बिल वापिस ले चुकी है लेकिन भारी विरोध या टकराव के बाद लेकिन तीसरे कार्यकाल में मोदी सरकार का अपने फैसलो से यूं पलटना हैरान करने वाला है।
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