कलमदार

मध्यप्रदेश – सीआईए की रिपोर्ट पता चल सकती है लेकिन भाजपा की नहीं

भाजपा जिस तरह से पिछले एक दशक से पोखरण विस्फोट कर रही है उसके बाद अब लोग यही कहने लगे हैं एक बार यदि कोशिश हो तो सीआईए की रिपोर्ट पता कर सकते हैं लेकिन भाजपा क्या करने वाली है यह पता करना मुश्किल है और शायद यही भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की धमक का राज भी है। दरअसल भाजपा में जब से वर्तमान राष्ट्रीय नेतृत्व प्रभावित हुआ है तब से अधिकांश फैसले चोंकाने वाले होते हैं कयास लगाने वाले कहीं चुप ना हो जाए इसलिए बीच-बीच में एक दो फैसले ऐसे भी करते हैं जिसकी संभावना होती है मसलन पश्चिम बंगाल में शुभेदू अधिकारी का मुख्यमंत्री बनना लेकिन अधिकांश फैसले तो ऐसे होते हैं जिसकी कोई कल्पना भी नहीं कर सकता और यह फैसला राष्ट्रपति के चयन लोकसभा अध्यक्ष का चयन राज्यपाल और मुख्यमंत्री के चयन से लेकर भाजपा के राष्ट्रीय पादेशिक पदाधिकारी के बारे में भी लिया जाता है।
लोकसभा और विधानसभा के चुनाय के दौरान टिकट वितरण में भी धमाके देखने को मिलते हैं हाल ही में मध्य प्रदेश में दो फैसाले ऐसे हुए जिसकी बिल्कुल भी संभावना नहीं थी इन दो फैसलों नरोत्तम मिश्रा का टिकट विदिता विधानसभा के उपचुनाव में काटना और लखन पटोन से विभाग वापस ले लेने के बाद भाजपा के दिग्गज नेता भी सहम गए है वही कार्यकर्ता उत्साहित है कि उनकी भी लॉटरी खुल सकती है जैसे रजनीश अग्रवाल को राज्यसभा भेजने के समय खुली। बहरहाल हाल ही में हुए दो फैसलों ने एक बार भाजपा के चौकाने वाले फसलों की याद ताजा कर दी जिसमें दतिया विधानसभा के उपचुनाव को लेकर पूर्व मंत्री नरोत्तम मिश्रा पूरी तरह आश्वस्त थे कि उन्हें ही टिकिट मिलेगा और वे चुनाव लड़ने की पूरी तैयारी भी कर रहे थे नामांकन फार्म भी ले लिया था कार्यकर्ता से लेकर समूची भाजपा और आमजन भी यह मानकर चल रहे थे की नरोत्तम मिश्र यह उपचुनाव लड़ेंगे लेकिन और ऐन वक्त पर पार्टी ने आशुतोष तिवारी देवदत दुबे को प्रत्याशी घोषित कर दिया है उसके बाद जो कुछ हुआ और अभी जो दतिया में चल रहा है यह सब कुछ जग जाहिर है इस घटनाक्रम की लोग चाय चौपाल और पान के टपरी पर चर्चा कर ही रहे थे कि मंत्री अचानक से बुधवार की सुबह मह खचर तेजी से फिर चापरल हुई कि प्रदेश के पशुपालन एवं डेयरी मंत्री लखन पटेल से मुख्यमंत्री ने विभाग वापस ले लिया है और आनंद विभाग उन्हें दे दिया गया है चर्चा तो यहां तक है कि ऊपर से इशारा पटेल की मंत्री पद से अलग करने का था लेकिन मुख्यमंत्री ने फिलहाल उन्हें रोक रखा है विभाग बदल जाने के बाद मंत्री लखन पटेल राजधानी भोपाल से सीधे दमोह के लिए रवाना हो गए फिलहाल वे किसी भी प्रकार की प्रतिक्रिया देने से बच रहे हैं विभाग क्यों वापस लिया यह पूरी तरह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन ऐसी चर्चा है कि मध्य प्रदेश में स्वावलंबी गौशालाएं शुरू होने थी इनके लिए चुनी गई कई संस्थाओं की स्थिति से सरकार संतुष्ट नहीं थी इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों और मंत्री की सहमति से उन संस्थाओं को काम देने की तैयारी लगातार जारी भी पिछले कुछ महीने से मुख्यमंत्र भी इस मुद्दे पर मंत्री को समझा चुके थे स्वालंबी गौशालाओं के लिए संस्थाओं को जमीन आवंटन के मामले की शिकायत आरएसएस और भाजपा के राष्ट्रीय नेतृत्व तक पहुंच चुकी थी और इसी के बाद यह बड़ा फैसला लिया गया।
कुल मिलाकर कारण जो भी हो लेकिन भाजपा जिस तरह से फैसले लेती है वह अचंभित करने वाले ही होते है जब विजयशाह नरेंद्र शिवाजी पटेल प्रतिभा बागरी सहित लगभग आधा दर्जन मंत्री ऐसे रहे जो विवादों में लबे समय तक रहे जिनके इस्तीफ की माग विपक्षी दल भी करता रहा लेकिन तब भाजपा ने किसीभी प्रकार की कार्रवाई किसी मंत्री पर नहीं की लेकिन अचानक से लखन पटेल का विभाग वापस लेने के बाद अच लोग इसी खोजबीन में लगे है कि आखिर लखन पटेल ने ऐसा क्या किया जिसके लिए संभावित मंत्रिमंडल विस्तार का इंतजार भी नहीं किया गया तभी लोग कह रहे हैंकि कभी ऐंसा हो सकता है कि सीआईए की रिपोर्ट कहीं से लीक हो जाए पता चल जाए लेकिन भाजपा का राष्ट्रीय नेतृत्व जो फैसले लेता है उसको पता करना मुश्किल है नरोत्तम मिश्रा के बारे मैतो यही चर्चा थी कि वे केंद्रीय गृहमंत्री और भाजपा के सबसे बड़े रणनीतिकार अमित शाह के करीबी हैं इसके बाद भी उन्हें भनक नहीं लगी जाहिर है हाल ही के इन दो घटनाक्रम के बाद अब भाजपा के अधिकांश नेताओं के भ्रम टूट गए है कि हम कुछ भी करें पार्टी कुछ नहीं करेगी अब जरा सी चूक या कोई बड़ी गलती जो भले निगाहें से बच नहीं सकती और फिर इसके बाद नित सार्वजनिक ना हो लेकिन पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व की तो तो क्या फैसला लेगा आपको भनक भी नहीं लगेगी प्रदेश में आगामी मंत्रिमंडल विस्तार में बहुत कुछ इसी तरह के विस्फोट देखने को मिल सकते हैं।

@ देवदत्त दुबे 

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