नई दिल्ली। जंतर-मंतर पर कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए विरोध प्रदर्शन के बाद सोशल मीडिया पर एक नया डिजिटल अभियान तेजी से चर्चा में आ गया है। ‘रिजर्वेशन हटाओ आंदोलन’ (RHA) नाम से चल रहे इस अभियान ने कम समय में बड़ी ऑनलाइन मौजूदगी दर्ज कराने का दावा किया है।आंदोलन से जुड़े इंस्टाग्राम अकाउंट के अनुसार, उसके 5.1 मिलियन (51 लाख) से अधिक फॉलोअर्स हो चुके हैं। दावा किया जा रहा है कि इस डिजिटल अभियान को मुख्य रूप से सामान्य वर्ग और ओबीसी समुदाय के युवाओं का समर्थन मिल रहा है, जो आरक्षण व्यवस्था पर नए सिरे से बहस की मांग कर रहे हैं। हालांकि, इस फॉलोअर संख्या और आंदोलन के प्रभाव की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। इसलिए इन दावों को फिलहाल आंदोलन से जुड़े पक्ष के दावे के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सोशल मीडिया अब केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं रह गया है, बल्कि वह जनमत तैयार करने और युवाओं को जोड़ने का प्रभावी मंच बन चुका है। जंतर-मंतर के प्रदर्शन के बाद RHA अभियान की ऑनलाइन सक्रियता ने इसी बदलाव की ओर संकेत किया है।सोशल मीडिया पर इस अभियान की बढ़ती चर्चा के साथ राजनीतिक हलकों में भी नई बहस शुरू हो गई है। एक ओर समर्थक इसे समान अवसर और मेरिट आधारित व्यवस्था की मांग बता रहे हैं, तो दूसरी ओर आरक्षण समर्थक इसे सामाजिक न्याय की व्यवस्था पर सवाल उठाने वाला अभियान मान रहे हैं।
फिलहाल इतना स्पष्ट है कि आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में आता दिखाई दे रहा है। लेकिन सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली लोकप्रियता को वास्तविक जनसमर्थन मानने से पहले उसके तथ्यों और स्वतंत्र स्रोतों से पुष्टि आवश्यक होगी। हलाकि डिजिटल युग में किसी भी आंदोलन की सफलता केवल फॉलोअर्स की संख्या से नहीं, बल्कि उसके विचारों, सामाजिक स्वीकार्यता और लोकतांत्रिक प्रभाव से तय होती है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि यह ऑनलाइन अभियान वास्तविक जनआंदोलन का रूप ले पाता है या केवल सोशल मीडिया तक सीमित रहता है। #rha #bharatbhvh #cjp
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