नई दिल्ली। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर कांग्रेस ने अपना राजनीतिक अभियान और तेज कर दिया है। मंगलवार को हुई कांग्रेस कार्य समिति (CWC) की बैठक में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने चुनाव प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि हाल के चुनावों में पारदर्शिता नहीं रही। ये राहुल गांधी और कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं; चुनाव आयोग और भाजपा इन आरोपों को स्वीकार नहीं करते।करीब ढाई घंटे चली CWC बैठक में 68 सदस्यों ने हिस्सा लिया। बैठक के बाद कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे, SIR को तत्काल रोकने और पार्टी के दावे के अनुसार हटाए गए 13.30 करोड़ नामों को बहाल करने की मांग रखी।
बैठक में राहुल गांधी ने कथित तौर पर कहा कि ईवीएम और मतदाता सूची दोनों को लेकर गंभीर सवाल हैं और हाल के चुनावों को उन्होंने अवैध बताया। कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने बैठक के बाद राहुल गांधी के हवाले से चुनावों को पारदर्शी नहीं होने और ‘मैच फिक्सिंग’ जैसे आरोपों की बात कही।कांग्रेस का कहना है कि पिछले कुछ समय से राहुल गांधी कर्नाटक, हरियाणा और महाराष्ट्र के चुनावों तथा मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों का मुद्दा उठा रहे हैं। पार्टी का दावा है कि SIR और वोटर लिस्ट में बदलाव से जुड़े हालिया घटनाक्रमों ने इन सवालों को और गंभीर बना दिया है।
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर कई मांगें सामने रखीं। इनमें मतदाता सूची में बड़े बदलावों का पूरा डेटा सार्वजनिक करना, जिन मतदाताओं के नाम हटाए जाएं उन्हें इसकी सूचना देना और अपील का अवसर देना, राजनीतिक दलों को समय पर चुनाव संबंधी डेटा उपलब्ध कराना तथा गंभीर विसंगतियों की स्वतंत्र और समयबद्ध जांच शामिल हैं। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने SIR और अपने निर्णयों का बचाव किया है। आयोग का कहना है कि उसके फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए गए हैं और आयुक्तों के बीच विचार-विमर्श के दौरान अलग-अलग राय होना संस्थागत प्रक्रिया का हिस्सा है। हाल में आयोग ने मतदाता सूची से जुड़े सॉफ्टवेयर की समीक्षा की घोषणा भी की है। मामला अब राजनीतिक बहस से आगे न्यायिक स्तर पर भी पहुंच गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्य चुनाव आयुक्त की कार्यप्रणाली और SIR की वैधता को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति दी है।
कांग्रेस ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को संसद, अदालत और सार्वजनिक प्रदर्शनों के जरिए आगे उठाएगी। वहीं चुनाव आयोग की ओर से प्रक्रिया को वैधानिक बताते हुए अपने फैसलों का बचाव किया जा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में SIR, मतदाता सूची और चुनाव आयोग की पारदर्शिता भारतीय राजनीति के प्रमुख विवादित मुद्दों में बने रहने की संभावना है।
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