संस्कृति

महाकाल लोक में शिवराज को राजनैतिक अभयदान !

मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्धारा राजाधिराज महाकाल की नगरी उज्जैन में आगमन और मध्यप्रदेश शासन द्धारा निर्मित दिव्य भव्य महाकाल लोक के प्रथम चरण का लोकार्पण किया गया । प्रायः राजनैतिक व्यक्तियों के प्रत्येक क्रियाकलापों को आमजनमानस मेेें राजनैतिक दृष्टिकोण से ही देखा समझाा परखा जाता है । लेकिन इससे इतर प्रत्येक व्यक्ति के अंर्तमन में भी किसी धर्म संस्कृति के प्रति एक आकर्षण अथवा अभिमान होता है जो समय समय पर लौकिक व्योवहार पर प्रभावी सिद्ध होता है । मंगलवार को नरेंद्र मोदी भगवान महाकाल की आत्मिक आराधान एवं पूजन के उपरांत प्रधानमंत्री से अधिक एक शिवभक्त के रूप में महाकाल लोक के प्रांगड़ में अवलोकन करते हुए दिखाई दिये। सोशल मीडिया पर भी उनका एक पुराण वीडियो वायरल होता रहा जिसमे मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में महाकाल मंदिर आये थे , खुद मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान उन्हे बारीकी से एक एक निर्माण और उसके सांस्कृतिक महत्व से अवगत करा रहे थे और बहुत लंबे समय के बाद किसी राजनैतिक परिदृश्य में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहन के बीच की केमेस्ट्री  देखने को मिली । आध्यात्मिक और सांस्कृतिक परिदृष्य मे यह घटना जितनी सामान्य कही जा सकती है राजनैतिक रूप से भी इसके पीछे के कई मायने उभर कर सामने आये है।
2018 के बाद से ही मध्यप्रदेश की राजनीति में अस्थिरता का दौर जारी रहा है । गिनती के विधायकों से बनी कमलनाथ सरकार जहां बमुश्किल अपने 15 महीने का कार्यकाल पूरा कर सकी तो कांग्रेस सरकार के गिरने के बाद से ही लगभभ 15 साल से शिवराज सिंह चौहान के इकतरफा नेतृत्व में चलने वाली सरकार और संगठन में भी अंदरूनी खदबदाहट की खबरे रह रह कर सामने आती रहती है। फिर चाहे वह गुटों में बटती जा रहा भाजपा संगठन हो या बड़े नेताओं की आपसी मेल मुलाकातों का दौर हो प्रत्येक राजनैतिक घटनाक्रम का पहला और अंतिम फोकस ले-देकर मुख्यमंत्री की कुर्सी पर जाकर ठहरता है। लेकिनवर्तमान में  मध्यप्रदेश के जो  राजनैतिक हालत हैं  , पूर्व  मुख्यमंत्री कमलनाथ और दिग्यविजय जिस तरह खार खाये बैठे हुए हैं और अपनी पूरी  योग्यता, अनुभव मध्य्प्रदेश में आने वाले विधानसभा चुनावो  में खपा रहे है उससे मध्यप्रदेश में भाजपा के शीर्ष नेतृत्व  के लिए गुजरात या  अन्य प्रदेशों  की तर्ज  पर नेतृत्व परिवर्तन का प्रयोग करना घातक सिद्ध होगा और हकीकत यह भी है की प्रदेश में 18 साल बाद भी शिवराज सिंह चौहान का विकल्प शायद तैयार नहीं हुआ है । 
लेकिन गनीमत यह है कि भाजपा में पुराने दिग्गज हो या नये महारथी सबको एक बात का स्पष्ट रूप से पता है कि बिना मोदी शाह के सत्ता हो या संगठन देश प्रदेश में भाजपा तो क्या विरोधी पार्टियों में उठापठक होना संभव नहीं है। यही कारंण है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दौरा हो या गृहमंत्री अमित शाह का मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री सहित संभावित चेहरे भी अपनी उपस्थिति और प्रतिभा को दर्ज करवाने का कोई मौका नहीं छोड़ते । मध्यप्रदेश में पिछले दो सालों में होने वाले बड़े आयोजनों की देश भर में चर्चा होना इसका सबूत है।
महाकाल लोक का लोकार्पण संभवतः मध्यप्रदेश सरकार का किसी सांस्कृतिक विरासत को व्यापक स्तर पर संवारने का या कहें की दक्षिण भारत की तर्ज पर विशुद्ध धर्म और संस्कृति को राजनीति और स्वाभिमान से जोड़ने का प्रथम प्रयास होगा और जिस तरह से महाकाल लोक संपूर्ण देश में चर्चा का विषय बना वह मध्यप्रदेश के लिये तो अभूतपूर्व है जो निश्चित ही पर्यटन के साथ साथ प्रदेश के लिये अन्य विकल्प भी खोलेगी। और प्रदेश में एक सांस्कृतिक नवाचार का शुभारम्भ करेगा ।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने महाकाल लोक के भ्रमण के बाद अपने संबोधन में सिंहस्थ कुंभ में किये गये अपनी परिचर्चा और महाकाल की नगरी में प्रांगण को भव्य बनाने के अपने संकल्प को मूर्त रूप देने के लिये शिवराज सिंह चौहान और उनकी टीम की आत्मीय सराहना की । उन्होने मंच से शिवराजसिंह चौहान को अन्य मंचो की तरह लोकप्रिय , या यशस्वी अनुभवी जैसी संज्ञाओं से न पुकारते हुए उन्हे भाई शिवराज सिंह कहकर संबोधित किया। और महाकाल लोक में ही एक प्रभावी उद्बोधन दिया भारत के अनेक दिव्य और प्राचीन मंदिरों और सांस्कृतिक धरोहरो के साथ इस प्रयास की सराहना की । मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी पिछले लगभग चार वर्शो से इस कार्य को अपनी प्रथम प्राथमिकताओं में शामिल किया हुआ था और काशी विश्वनाथ कोरिडोर के उद्घाटन के बाद इस कार्य में और अधिक तेजी आई । और तय समय में ही महाकाल लोक के प्रथम चरण का न सिर्फ निर्माण कार्य पूरा हुआ वरन इसका लोकार्पण कार्यक्रम की भव्यता और सफलता ने भी देश विदेश में सुर्खियां बटोरी जिसके लिए मुख्यमंत्री ने अपने विस्वस्थ मंत्री भूपेंद्र सिंह के नेतृत्व में प्रशानिक अधिकारीयों को पूरी जिम्मेवारी सौंपी जिन्होंने प्रत्येक कर्यक्रम को अभिनव रंग दिया ।

महाकाल  लोक के मूर्त रूप ने जहां मध्यप्रदेश के सांस्कृतिक गौरव को देश में प्रसिद्धि दिलाने की परंपरा की शुरूवात की है तो राजनैतिक रूप से भी फिलहाल विधानसभा चुनावों के पहले मध्यप्रदेश में नेतृत्व परिर्वतन की तमाम अटकलों पर पूर्ण विराम लगाते हुए मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को महाकाल कोरिडोर में प्रधानमंत्री द्धारा राजनैतिक अभयदान दिया गया है।

 

अभिषेक तिवारी 

 

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