अरावली पर्वतमाला को बचाने आम जनता के प्रदर्शन बढ गये है सुप्रीम कोर्ट के अरावली पहाड़ियों की परिभाषा बदलने के बाद लगभग पूरे उत्तर भारत में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए हैं अरावली दुनिया की सबसे पुरानी भूगर्भीय संरचनाओं में से एक है जो राजस्थान हरियाणा गुजरात और राजधानी दिल्ली तक फैली हुई ह केंद्र सरकार की सिफारिशों के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की जिस परिभाषा को स्वीकार किया है उसके अनुसार आसपास की ज़मीन से कम से कम 100 मीटर ऊँचे जमीन के हिस्से को ही अरावली पहाड़ी माना जाएगा जबकि पर्यावरणविदों का कहना है कि सिर्फ़ ऊँचाई के आधार पर अरावली को परिभाषित करने से कई ऐसी पहाड़ियों पर खनन और निर्माण के लिए दरवाजा खुल जाने का खतरा पैदा हो जाएगा जो 100 मीटर से छोटी हैं झाड़ियों से ढँकी हुई और पर्यावरण के लिए ज़रूरी हैं
⇑ वीडियो समाचारों से जुड़ने के लिए कृपया हमारे चैनल को सबस्क्राईब करें , धन्यवाद।
खाडी युद्ध पर लिखने के लिए कुछ भी नया नही है सिवाय इसके कि जंग…
बुंदेलखंड में गूँजेगी चीतों की दहाड़ चीतों की पुनर्वसाहट का नया बसेरा बनेगा बुंदेलखंड सीएम…
मप्र के मुख्यमंत्री डाक्टर मोहन यादव 60 साल के हो गये.इस वयसंधि के लिए एक…
पत्नी की हत्या कर घटना को दुर्घटना दिखाने का प्रयास तीन आरोपी गिरफ्तार सागर। जिले…
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्य और केंद्र की सत्ता को मिला कर देश में सबसे…
कड़ान नदी के तट पर स्थित 400 वर्ष पुराने मंदिर में अज्ञातवास के दौरान आए…